ट्राइसिटी के प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर केंद्र ने यूटी प्रशासन के साथ साथ पंजाब और हरियाणा सरकारों से भी एमओयू की शर्तों पर जवाब मांगा है।
केंद्र से पत्र आने के बाद प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर केंद्र सरकार को जल्द अपना जवाब भेजने को कहा है। केंद्र जानना चाहता है कि ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को पंजाब और हरियाणा चंडीगढ़ के साथ मिलकर कैसे आगे ले कर जाएंगे और इस प्रोजेक्ट के लिए तैयार एमओयू पर दोनों राज्यों को किसी तरह की आपत्ति तो नहीं है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से दोनों राज्यों से इस प्रोजेक्ट के लिए फंड के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। यूटी प्रशासन और पंजाब व हरियाणा सरकारों का जवाब आने के बाद केंद्र जल्द ही बैठक बुलाएगा जिसमें इस प्रोजेक्ट के एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।
एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद ही इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का गठन होगा। एक साल से एमओयू तैयार किया जा रहा है। पंजाब और हरियाणा की मांग पर प्रशासन ने एमओयू की कुछ शर्तों में बदलाव कर एमओयू तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट के लिए तैयार एमओयू में पंजाब और हरियाणा की सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में न किया जाए।
इसके बाद एमओयू के ड्रॉफ्ट से अब इस शर्त को हटा लिया गया है। एमओयू में स्पष्ट किया गया है कि ट्राइसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा।
एसपीवी का नाम चंडीगढ़ ट्राइसिटी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (सीटीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट, 1956 के तहत पंजीकृत होगी। अब सीटीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे ले जाएगी और प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम फैसले लेने का अधिकार भी कंपनी के पास ही होगा।
यूटी के प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा ने कहा कि केंद्र से आए पत्र के बाद उसका जवाब तैयार किया जा रहा है। पंजाब और हरियाणा को भी अपने अपने जवाब भेजने होंगे।