सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर लाखों की अदायगी की तलवार लटक गई है।
मार्केट कमेटी ने स्कूल को मंडीकरण बोर्ड की ओर से निर्धारित किराए के मुताबिक अदायगी करने का नोटिस दिया है।
अदायगी न करने की सूरत में बिल्डिंग खाली कराने की चेतावनी भी दी है। इससे स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की नींद उड़ गई है।
इस बिल्डिंग में पहले काफी समय तक लाइब्रेरी थी। मार्केट कमेटी ने एक जुलाई 1976 को प्रस्ताव पास कर इमारत को 25 साल के लिए लीज पर देने का फैसला किया था।
इसका किराया साठ रुपये प्रति वर्ष था। लीज खत्म होने के बाद मार्केट कमेटी ने स्कूल को पत्र लिखा था। जवाब में तत्कालीन प्रिंसिपल ने सितंबर-10 में लीज पचास साल और बढ़ाने की मांग की थी।
तत्कालीन प्रिंसिपल के पत्र को आधार बना कर कमेटी ने पचास साल लीज बढ़ाने की बात मान ली थी। पर बाद में मंडीकरण बोर्ड ने नए सिरे से असेसमेंट करा कर सालाना किराया साठ रुपये से बढ़ा कर 29,671 रुपये कर दिया।
इससे स्कूल पर कई लाख रुपये किराया बकाया हो गया। कोई आय न होने के कारण स्कूल किराया जमा कराने में असमर्थ है।
वहीं, मार्केट कमेटी ने डीईओ और डीजीएसई को किराए के 11 लाख रुपये अदा करने को लिखा है। साथ ही यह मामला जिला कलेक्टर को भेजने व बिल्डिंग खाली कराने की चेतावनी भी दी है।
डीईओ ने स्कूल प्रिंसिपल से इस संबंधी रिकार्ड तलब किया है। मौजूदा प्रिंसिपल डेजी ने मार्केट कमेटी को पत्र लिख कर कहा है कि अब लीज की मियाद या किराया बढ़ाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
2010 में तत्कालीन प्रिंसिपल के पत्र की जानकारी उन्हें नहीं है। इस स्कूल में आसपास के इलाके की लड़कियां शिक्षा प्राप्त करती हैं।
शहरवासियों ने मांग की कि बिल्डिंग स्कूल के नाम कर दी जाए। मार्केट कमेटी के सचिव निर्मल सिंह पोहाल ने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
डीईओ मेवा सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। जबकि, एसडीएम सुखजीत पाल सिंह ने कहा कि मार्केट कमेटी किराया लेने की हकदार है। शिक्षा विभाग को किराया जमा कराने का प्रबंध करना चाहिए।