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Chandigarh News: हर जिले में सरकारी वृद्धाश्रम के निर्माण में देरी पर हरियाणा व पंजाब को नोटिस

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में प्रत्येक जिले में सरकारी वृद्धाश्रम स्थापित न किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अवमानना याचिका पर दोनों राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका मोहाली नगर निगम के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी की ओर से दायर की गई है।

याचिका में पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों, सामाजिक सुरक्षा विभागों के प्रमुख अधिकारियों और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और गमाडा की ओर से पेश वकीलों ने नोटिस स्वीकार कर लिया जिसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 के लिए तय की है।
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मामला वर्ष 2014 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजंस एक्ट-2007 के अनुपालन की मांग की गई थी। इस कानून के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम 150 क्षमता वाला एक सरकारी वृद्धाश्रम स्थापित करना अनिवार्य है। पंजाब सरकार ने 2019 में हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया था कि वह 2022 तक सभी 21 जिलों में सरकारी वृद्धाश्रम बना देगी। वहीं हरियाणा सरकार ने हलफनामा दाखिल कर 2024 तक यह कार्य पूरा करने का भरोसा दिया था। इन दोनों के विश्वास दिलाने के आधार पर 2020 में मूल याचिका का निपटारा कर दिया गया था।
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