चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित कॉलोनी नंबर-4 और संजय कालोनी को तोड़ने के लिए नोटिस लगा दिया है। इससे इन दोनों कालोनियों में रहने वाले हजारों लोगों की नींद उड़ गई है। लोगों का कहना है कि जिनके पास बायोमेट्रिक सर्वे और अन्य दस्तावेज हैं, उन्हें मकान देने के बाद ही कॉलोनी तोड़ी जानी चाहिए।
लोग प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप भी लगा रहे हैं, क्योंकि पहले प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि जिन लोगों के पास बायोमेट्रिक सर्वे व अंगूठे के निशान की कॉपी मौजूद है और किन्हीं कारणों से उन्हें पुनर्वास योजना के तहत मलोया में मकान नहीं मिला है तो उन्हें किफायती किराया आवासीय योजना के तहत 3000 रुपये प्रति महीने के किराए पर मलोया में मकान दिया जाएगा। लेकिन मंगलवार को कालोनी के लोगों के घरों के आगे चिपकाए गए नोटिस में साफ लिखा है कि यह कालोनी अवैध है और इसे दो महीने के अंदर ध्वस्त कर दिया जाएगा, इसलिए इसे खाली कर दिया जाए।
नोटिस में मकान देने संबंधित कोई जानकारी नहीं दी गई है। नोटिस को पढ़ने के बाद से लोग बेहद चिंतित हैं। कॉलोनी वासियों ने मांग की है कि मलोया व अन्य कॉलोनी में अभी मकान खाली पड़े हैं, इसलिए उन्हें बेघर न किया जाए। पीएम आवास योजना के तहत भी मकान नहीं दिए गए हैं, इसलिए उस योजना के अंदर भी लोगों को मकान दिए जा सकते हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में भी कॉलोनी को खाली कराने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कोरोना के आने की वजह से अभियान को टाल दिया गया था।
बहुत से लोगों के पास बायोमेट्रिक सर्वे के दस्तावेज मौजूद
वर्ष 2005-06 में यूटी प्रशासन की तरफ से कॉलोनी में एक बायोमेट्रिक सर्वे कराया गया था, उस सर्वे के आधार पर ही लोगों को मलोया में फ्लैट दिए गए हैं। कालोनी नंबर-4 समेत विभिन्न कालोनियों में अभी बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनका बायोमेट्रिक सर्वे है और वे मकान पाने की पात्रता रखते हैं, लेकिन बहुत मामूली कमी की वजह से उन्हें मकान नहीं मिला। इनमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनका घर सर्वे के दौरान बंद पाया गया था। इनमें कई लोग ऐसे हैं, जो पिछले 25 से 35 साल से कालोनी में ही रहते हैं। लगातार मांग की जा रही है कि प्रशासन एक बार सर्वे करा ले, मेहनत न करना पड़े इसलिए एस्टेट ऑफिस ने कभी दोबारा सर्वे नहीं किया।