चंडीगढ़ में बिछी स्मॉग की चादर
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चंडीगढ़ गुरुवार को भी पूरे दिन गैस चैंबर बना रहा। प्रदूषण का स्तर बहुत खराब की श्रेणी में रहा। पूरे दिन एक्यूआई 300 से नीचे नहीं आया, जबकि हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा बहुत ज्यादा रही। शहर की सड़कों पर स्मॉग की चादर बिछी नजर आई, जिससे विजिबिलिटी भी कम हो गई। बढ़ा एक्यूआई लोगों को बीमार भी कर रहा है।
सेक्टर-53 के एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन पर प्रदूषण का स्तर पूरे दिन 350 के करीब रहा। सुबह 8 बजे ही प्रदूषण बहुत खराब की श्रेणी में चला गया। इसके बाद धीरे-धीरे प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा। सुबह 11 बजे के बाद एक्यूआई में हल्का सुधार देखने को मिला और प्रदूषण का स्तर 350 से नीचे आया। हालांकि हवा में पीएम 2.5 की मात्रा अभी भी गंभीर स्तर पर बनी हुई है। प्रदूषण का यह स्तर किसी स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है। उन लोगों की परेशानी ज्यादा बढ़ा सकता है, जिन्हें सांस संबंधी कोई बीमारी है। शहर की हवा में पीएम 2.5 का इस कदर बढ़ जाना बहुत चिंता की बात है, क्योंकि सबसे ज्यादा यही लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। सेक्टर-22 और सेक्टर-25 के एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन पर भी गुरुवार को प्रदूषण बहुत खराब की श्रेणी में रहा।
बदले मौसम ने चंडीगढ़ की हवा की जहरीली
पर्यावरण विभाग के निदेशक देबेंद्र दलाई ने बताया कि अचानक मौसम में आए बदलाव की वजह से शहर में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों में जल रही पराली, गुरु पर्व पर हुई आतिशबाजी, गाड़ियों-कारखानों से निकला प्रदूषण भी एक वजह है। उन्होंने बताया कि इन दिनों हवा बिल्कुल भी नहीं चल रही है, इसलिए हवा में प्रदूषण इकट्ठा हो गया है और वह ऊपर की ओर उठ नहीं पा रहा है।
एक्यूआई (10 नवंबर)
समय सेक्टर-53 सेक्टर-22
सुबह 8 बजे 358 331
9 बजे 361 323
10 बजे 358 322
11 बजे 354 316
दोपहर 12 बजे 348 312
एक बजे 347 311
दो बजे 346 311
तीन बजे 345 311
शाम 4 बजे 345 312
5 बजे 345 313
6 बजे 345 318
7 बजे 344 316
क्या होता है पीएम 2.5
पीएम 2.5 प्रदूषक कणों की उस श्रेणी को संदर्भित करता है, जिसका आकार 2.5 माइक्रोन के करीब का होता है। ये बहुत छोटे कण होते हैं, जो सांस लेने के दौरान शरीर में प्रवेश कर गले में खराश, जलन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। पीएम 2.5 के बढ़ने के कारण धुंध छाने और साफ न दिखाई देने के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।