हरियाणा विधानसभा के 11 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस बार प्रश्न काल नहीं होगा। विधानसभा कार्यालय से इस बावत सभी विधायकों को सूचित करने के लिए पत्र जारी कर दिया गया है। हरियाणा विधानसभा के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है।
प्रश्नकाल न होने का कारण कम समय में विधानसभा सत्र की घोषणा करना भी है। प्रश्नकाल के लिए कम से कम 15 दिन का समय चाहिए होता है। हालांकि, विधानसभा कार्यालय में अभी तक सिर्फ नलवा विधायक संपत सिंह के प्रश्न ही पहुंचे हैं। राज्य के 90 विधानसभा क्षेत्रों के किसी अन्य विधायक के प्रश्न नहीं पहुंचे हैं।
इस मामले में भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज का कहना है कि बहुत शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाया गया है। प्रश्न लगाने के लिए कम से कम 15 दिन का समय चाहिए होता है। इस संदर्भ में निर्णय लेना बिजनेस एडवाइजरी कमेटी का काम है।
उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष में 365 में से केवल 10-12 दिन ही हमारा सदन चलता है। जबकि, साथ लगते प्रदेश में कम से कम 50 दिन सदन चलता है। हिंदुस्तान के सभी प्रदेशों में से हरियाणा में सबसे कम दिन सदन चलाया जाता है।
भाजपा नेता कहते हैं कि सीएम डेमोक्रेटिक हेड न होकर एक तानाशाह के रूप मे काम करना चाहते हैं। सीएम ने पांच वर्षों तक विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया।