हरियाणा में जघन्य अपराधों में संलिप्त हार्डकोर क्रिमिनल्स को पांच साल से पहले पैरोल नहीं मिलेगी। हरियाणा सरकार ने गुड कंडक्ट प्रीजनर(टेंपरेरी रिलीज) एक्ट, 1988 में संशोधन पर अपनी सहमति दे दी है।
शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार द्वारा पेश किए गए हलफनामे में यह जानकारी दी गई। एआईजीपी(प्रीजन) जगजीत सिंह की ओर से हाईकोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में कहा गया कि सरकार जेलों में पैरोल के मामले पर पूरी तरह गंभीर है।
सभी जेल अधीक्षकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने हरियाणा सरकार के एफिडेविट को रिकार्ड में ले लिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
हरियाणा सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में कहा गया है कि जेलों में पेरौल पर कैदियों को छोड़ने के मामले में 22 जनवरी को बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक की अध्यक्षता डीजी(जेल) ने की थी और सभी वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में निर्णय लिया गया कि आपराधिक घटनाओं में पीड़ितों, गवाहों और समाज की सुरक्षा के लिए जघन्य अपराधों में शामिल किसी भी कैदी को पांच साल से पहले कोई पैरोन नहीं दी जाए।
बैठक की सिफारिशों को हरियाणा सरकार से अवगत करवाया गया और हरियाणा सरकार ने तीन मार्च को हरियाणा गुड कंडक्ट प्रीजनर (टेंपरेरी रिलीज) एक्ट, 1988 में संशोधन पर अपनी सहमति दे दी है।