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महंगाई से राहत दिलाने को प्रशासन ने उठाया कदम

Mon, 28 Jul 2014 11:48 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सब्जियों और फलों की महंगाई से शहर के लोगों को जल्द राहत मिलेगी। प्रशासन जल्द ही सब्जियों और फलों पर ली जाने वाली फीस खत्म करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
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प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सलाहकार केके शर्मा के पास भेजा दिया है। गौरतलब है कि मार्केट कमेटी उपायुक्त कार्यालय के अंतर्गत काम करती है।

प्रशासन इस समय मार्केट कमेटी सेक्टर-26 मंडी में सब्जी और फलों के होने वाले कारोबार से 2 प्रतिशत चार्ज करता है। हर साल प्रशासन को मार्केट कमेटी फीस के तौर पर 6 करोड़ रुपये इकट्ठा होते हैं। बता दें कि केंद्र सरकार की हिदायत के बाद प्रशासन ने महंगाई पर रोक लगाने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया है।

3 अरब का कारोबार होता है हर साल

सेक्टर-26 मंडी में हर साल सब्जी और फल का करीब 3 अरब का कारोबार होता है। इसका दो प्रतिशत ही मार्केट फीस के तौर पर इकट्ठी होती है। प्रशासन के अनुसार, फीस खत्म करने से जमींदार सीधा अपनी सब्जी विक्रेता को बेच सकेगा।

इस समय जमींदार अपनी सब्जी और फल आढ़तियों के माध्यम से विक्रेता को बेचता है। जिससे शहर में अलग-अलग जगह पर सब्जी और फल सप्लाई होती है।

आढ़ती जमींदार से 2 प्रतिशत मार्केट फीस लेकर जमा करवाता है। मालूम हो कि दालों और अन्य खाद्य पदार्थों में पहले से ही मार्केट फीस खत्म है। सिर्फ चावल पर फीस चार्ज की जा रही है।

अकेले सेब से इकट्ठा होता हैं दो करोड़

जल्द ही सेब का सीजन शुरू होने वाला है। प्रशासन को फीस के तौर पर अकेले सेब से ही दो करोड़ रुपये की कमाई हर साल होती है, जबकि आलू और प्याज से एक करोड़ की फीस इकट्ठी हो रही है।

प्रशासन ने मार्केट कमेटी से आय और व्यय की पूरी डिटेल मंगवा ली है। इसके साथ ही फीस खत्म करने का प्रस्ताव आला अधिकारियों को भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि आला अधिकारी के कहने पर ही प्रस्ताव तैयार हुआ है।

इकट्ठी की हुई फीस से क्या होता है
कमेटी की ओर से जो फीस इकट्ठी की जाती है, उससे मंडी की साफ सफाई और सड़कों की मरम्मत पर खर्च किया जाता है। इसके बावजूद सेक्टर-26 मंडी के हालात अच्छे नहीं है।

यहां पर आने वाले लोगों को पार्किंग की काफी दिक्कत होती है। मार्केट कमेटी के इस समय 70 कर्मचारी हैं। इनका वेतन भी फीस से इकट्ठी हुई कमाई से किया जाता है।
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मल्टीनेशनल कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा

मार्केट कमेटी के चेयरमैन दिनेश महाजन का कहना है कि प्रशासन को मार्केट फीस समाप्त न करके बल्कि परचून के रेट तय करने का भी अधिकार दिया उनका कहना है कि ऐसा होने पर मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा मिलेगा।  

नहीं होनी चाहिए मार्केट कमेटी समाप्त
मार्केट कमेटी के अधिकतर निदेशक फीस खत्म न करने के पक्ष में है। निदेशक आनंद सिंह का कहना है कि ऐसे में कमेटी का कंट्रोल पूरी तरह से खत्म हो जाएगा ऐसे में जमींदारों की मदद कौन करेगा।
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