शहर में आग बुझाने के लिए कई जगह फायर हाइडेंट लगाए गए थे। वह अब नजर नहीं आते। कुछ अतिक्रमण के भेंट चढ़ गए तो कुछ को पानी के मिस्यूज के कारण बंद कर दिया गया। नगर निगम ने आग की घटनाओं से निपटने के लिए पिछले साल दो करोड़ का बजट रखा था, जिसमें से केवल 37 लाख रुपये ही खर्च किए गए। जबकि इस वर्ष बजट 12 करोड़ का है।
लापरवाही का आलम यह है कि विभाग ने सेक्टर-17 के फायर स्टेशन में फायर टेंडर बनाने के लिए छह साल पहले चेसिस खरीदी थी, जो आज तक खड़ी है। वहीं, तीन टाटा 207 खरीदी गई हैं, जिनमें आग बुझाने के उपकरण लगाए जाने हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
कई वर्ष पहले फिनलैंड से 60 मीटर की हाइड्रोलिक फायर लैडर खरीदने की तैयारी की गई थी, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभी फायर विभाग के पास 42 मीटर की हाइड्रोलिक लैडर है।
फायर कर्मियों के साथ भेदभाव
वर्ष 2008 में फायरकर्मी अमरजीत सिंह मावी की मौत के बाद नगर निगम ने पेंशन व अन्य सुविधाएं देने के लिए प्रस्ताव पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने अभी तक फैसला नहीं लिया। अमरजीत सिंह मावी को शहीद का दर्जा मिल गया, लेकिन उसके परिवार को उसका लाभ नहीं मिला।
एमसी चंडीगढ़ फायर एंड इमरजेंसी इंप्लाइज यूनियन के प्रधान हरजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि शहीद को पूरा लाभ मिलना चाहिए। इसके तहत एक्सट्राआर्डिनरी पेंशन, 10 लाख रुपये मुआवजा और अन्य सुविधाएं मिले।
लेकिन, अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। बाजवा का कहना है कि नगर निगम ने उस समय पांच लाख रुपये देने का एलान किया था, लेकिन नहीं दिया।
अब प्रशासन कराएगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
रविवार को सेक्टर-17 में एनआईईएलआईटी की इमारत के ढहने के बाद अब यूटी प्रशासन ने शहर की सालों पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। चंडीगढ़ की कई इमारतें हैं जिनकी चेकिंग नहीं हो पाई है।
यूटी प्रशासन ने इससे पहले भी कई ऐसी इमारतों की पहचान की थी। प्रशासन ने कई पुरानी इमारतों का सर्वे कराने के बाद रिपोर्ट तैयार की थी।
इस सर्वे के दौरान ही यह स्पष्ट हुआ था कि कई इमारतों में अच्छी क्वालिटी की ईंटें नहीं हैं। यह सर्वे वर्ष 2007 में सेक्टर-26 में सब्जी मंडी में शेड के गिरने के बाद हुआ था।
गिराया जा सकता है असुरक्षित इमारतों को
अब रविवार को हुई इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने यह तय किया है कि जल्द ही उन सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट करा लिया जाए। चंडीगढ़ के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में भी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की बात कही गई है।
इसके बाद जिन इमारतों को असुरक्षित घोषित किया जाएगा उन्हें गिराया जा सकता है। ध्यान रहे कि चंडीगढ़ सेंसटिव जोन 4 में आता है और इससे यहां की कई इमारतों को खतरा है।
भूकंप आने पर इन इमारतों के गिरने की संभावना है। ऐसे में खस्ताहाल हो चुकी इन इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी है।