छात्राओं के जींस पहनने व मोबाइल रखने पर पाबंदी लगाने की मांग कर रही महासभा को महम में निराशा हाथ लगी। महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत पदाधिकारियों ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि वे ऐसी किसी भी बात का समर्थन नहीं करते हैं।
इससे पहले, रविवार सुबह 12 बजे महम में प्रदेशाध्यक्ष रमेश पानू, प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मपाल सिवाच, प्रदेश प्रवक्ता ललित भारद्वाज, जिलाध्यक्ष संजय सहारण की अध्यक्षता में महासभा की बैठक हुई।
सभी ने लड़कियों के प्रति बढ़ रहे घिनौने कृत्यों पर आपत्ति जाहिर करते हुए वर्तमान शिक्षा पद्धति और लड़कियों के ड्रेस कोड और मोबाइल प्रयोग को कटघरे में खड़ा किया।
मुंह ढककर चलने पर विरोध जताया
सदस्यों ने लड़कियों के मुंह ढककर चलने पर भी विरोध जताया। लड़कियों के जींस व टॉप को पहनने को भड़काऊ वस्त्र बताते हुए आलोचना की। पदाधिकारियों ने बताया कि हिसार, भिवानी, जींद में इस मुद्दे पर खापों व पंचायतों से बात हुई है।
इसी मुद्दे को लेकर वे महम चौबीसी में आए हैं। यहां पर भी वे खाप प्रधानों व पंचायतों से बात करेंगे। लिव इन रिलेशनशिप को समाज पर कलंक बताया।
इस मौके पर दीपक मान, गोकल शर्मा, विकास पूनिया, ज्ञान चंद बंसल, कृष्ण बाल्मीकि, मनोज लाठर, डॉ. रामकुमार शर्मा, रामनिवास लाठर, रामकेश लाठर, बलराज पानू और साहिल मौजूद रहे।
बोले खाप सचिव और प्रधान
जब तक विचारों में बदलाव और संस्कृति का ज्ञान नहीं होगा, तब तक समाज में कोई बदलाव नहीं आ सकता। अकेले लड़कियों पर ड्रेस कोड थोप कर या मोबाइल रखने पर पाबंदी लगाकर हल नहीं होगा। कॉलेज स्तर पर शिक्षा में नैतिकता का चैप्टर होना चाहिए। मल्टी मीडिया की आज खास जरूरत है, इसका हर कोई दुरुपयोग ही नहीं करता। महम चौबीसी सर्वखाप ऐसी किसी बात का समर्थन नहीं करती। हमने राह से भटके युवाओं को सही दिशा दिखाई है। हमने हाल ही में दो परिवारों में ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं को रोका है।
रामफल राठी, सचिव, महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत।
कोई भी पाबंदी लड़की पर ही क्यों, लड़कों पर भी लगनी चाहिए। तभी हम बुराई को समाप्त कर सकते हैं। समाज को आगे ले जाने में दोनों की भागीदारी बराबर की है। यदि 30 साल के लड़के कुंवारे रहेंगे तो समस्या होना लाजमी है। हमें अपना गिरता लिंगानुपात सुधारने की जरूरत है। न कि लड़कियों की आजादी का हनन करने वाले फरमान सुनाने की।
धज्जाराम गोयत, तपा प्रधान, महम
बोले जिलाध्यक्ष और सदस्य
हम समर्थन की अपील करेंगे
हम युवाओं के विरोधी नहीं हैं। हमारा मकसद कोई फरमान सुनाना भी नहीं है। इसके लिए हम खाप के पदाधिकारियों व वरिष्ठ पंचों से मिलकर अपनी बात रखते हुए समर्थन की अपील करेंगे।
संजय सहारण, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय हिंदू महासभा
जींस, मोबाइल पर रोक रुढ़िवादी परंपरा
जींस और मोबाइल पर रोक रुढ़िवादी परंपरा है। इस पर प्रतिबंध लगा हम महिला समाज को पीछे धकेल देंगे। 21वीं सदी में जींस पहनने को गलत कहना और मोबाइल प्रयोग को रोकना न्याय संगत नहीं है। मोबाइल से लड़कियां विपरीत परिस्थिति में परिवार व पुलिस को सचेत कर सहायता ले सकती हैं। इन संसाधनों से उन्हें विहीन करना गलत है, यह एक संकीर्ण सोच है, इसका विरोध होगा।
- संतोष क्रांति, सदस्य, जनवादी महिला समिति