जजनोट कांड में जब्त 15 लाख रुपये की शिनाख्त तत्कालीन एसआई जोगिंदर सिंह ने शनिवार को सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में की। जोगिंदर सिंह ने कहा नीले पोलिथिन में 15 लाख रुपये थे, जिनमें 11 पैकेट एक-एक हजार के नोट और आठ बंडल पांच-पांच सौ के थे।
एसआई ने कहा कि 13 अगस्त 2008 को कंट्रोल रूम की सूचना पर सेक्टर 11 निवासी जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पर पहुंचकर मुंशी प्रकाश राम को पकड़कर पुलिस स्टेशन सेक्टर 11 लेकर आए थे।
मुंशी प्रकाश राम केपास 15 लाख रुपये थे जिससे उन्होंने जब्त कर मालखाने में जमा करवा दिया और प्रकाश राम को पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। प्रकाश राम और वकील संजीव बंसल ने पुलिस स्टेशन में आकर बताया था कि यह 15 लाख रुपये निर्मल सिंह को देने थे। मुंशी गलती से जस्टिस के घर पर पहुंच गया।
उधर, बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि यह सभी बयान रिकार्ड में नहीं लिए जा सकते क्योंकि एफआईआर 16 अगस्त को हुई थी। सारे बयान एफआईआर दर्ज होने से पहले दर्ज करवाए गए थे।
उधर सीबीआई वकील अनुपम गुप्ता ने कहा कि प्राथमिक जांच में दिए गए बयान माने जाएं । दोनों ने ही शुरूआती दौर में झूठ बोलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी।
रविंदर की विदेश जाने की अर्जी मंजूर
वहीं मामले में सह आरोपी दिल्ली के होटलियर रविंदर भसीन ने डेढ़ महीने के लिए विदेश जाने की अर्जी दायर की। इसे अदालत ने मंजूर कर लिया। मामले में जस्टिस निर्मलजीत कौर के गार्ड कांस्टेबल गुरविंदर सिंह के भी बयान दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि प्रकाश राम को पकड़कर उसने एसआई जोगिंदर के हवाले कर दिया था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई पांच जुलाई को तय की है।
यह है मामला
दायर मामला 13 अगस्त 2008 का है। पंजाब एंड हरियाण हाईकोर्ट केवकील संजीव बंसल ने अपने मुंशी प्रकाश राम को 15 लाख रुपये देकर जस्टिस निर्मल यादव के घर पहुंचाने केलिए कहा था।
मुंशी प्रकाश राम गलती से रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर केघर पहुंच गया था। जस्टिस निर्मलजीत कौर के नौकर ने मामले की शिकायत पुलिस को दी। इस तरह यह मामला खुला।