साल 2017 में दूसरा, 2018 में पहला और 2019 में तीसरा स्थान। एनआईआरएफ की रैंकिंग में नाइपर की इस गिरावट से विज्ञान जगत स्तब्ध है। नाइपर को सबसे कम अंक रिसर्च व प्रोफेशनल प्रैक्टिस में मिले हैं। इस कैटेगरी में क्वालिटी पब्लिकेशन और पेटेंट देखे जाने थे।
नाइपर को इसमें मात्र 69 अंक मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे पंजाब यूनिवर्सिटी को 88.14 और पहले स्थान पर रहे नई दिल्ली के जामिया हमदर्द को 90.70 अंक मिले। इसके साथ नाइपर के साथ कुछ विवाद जुड़े रहे। खासकर डायरेक्टर की नियुक्ति पर। इसमें मंत्रालय के साथ बाद में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को भी दखल देना पड़ा था।
पीजीआई अपनी रैंकिंग बचाने में कामयाब
मेडिकल कैटेगरी में पीजीआई ने अपनी रैंकिंग बचाए रखी है। पिछले साल भी वह दूसरे नंबर पर था। पहले नंबर पर एम्स है। हालांकि, दोनों संस्थानों के ओवरआल नंबरों में लगभग 10 अंक का अंतर रहा। एम्स को 87.52 नंबर मिले, जबकि पीजीआई को 77.88 अंक मिले। पीजीआई ने एम्स से मात परसेप्शन की कैटेगरी में खाई।
एम्स को परसेप्शन में सौ फीसदी मिले, जबकि पीजीआई को परसेप्शन में मात्र 64.87 नंबर मिले। इस वजह से पीजीआई एम्स से पिछड़ गया। परसेप्शन लोगों की राय से तय होता है। एम्स दिल्ली के बारे में हर कोई कहता है कि वह नंबर वन है, जबकि पीजीआई को अभी इस क्षेत्र में थोड़ी और मेहनत करनी होगी।
यह सबकी मेहनत का नतीजा है। हम लगातार दूसरे स्थान पर रहे हैं। अब हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इस बार कोशिश रहेगी कि पीजीआई देश का नंबर वन इंस्टीट्यूट बनेगा। इसके लिए पीजीआई मुख्य रूप से इनोवेशन, रिसर्च, पेंटेंट पर खास फोकस करेगा। -प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
अटल रैंकिंग में हमने बाजी मारी है। निरफ रैंकिंग में परसेप्शन व रिसर्च मैपिंग के कारण कुछ अंक कम मिले हैं। इसमें सुधार किया जाएगा। -डॉ. आशीष जैन, निदेशक आईक्यूएसी पीयू