चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक में सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से राज्यसभा में सदस्य के लिए एजेंडा पास कर दिया गया। अब नगर निगम अपना प्रस्ताव प्रशासन को भेजेगा। बता दें कि गृह मंत्रालय ने इस संबंध में यूटी प्रशासन से सुझाव मांगा था, जिसे प्रशासन ने नगर निगम को भेज दिया था। अब निगम सदन के फैसले को प्रशासन गृह मंत्रालय को भेजेगा। हालांकि सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल ने इस पद को न रखने का सुझाव निगम को दिया है।
बता दें कि पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में एक बिल डालकर चंडीगढ़ से राज्यसभा सदस्य चुनने की मांग उठाई थी। केंद्र से इस संबंध में चंडीगढ़ से सुझाव मांगा गया, केंद्र ने मामले को निगम के पास भेजा। नगर निगम ने कानूनी सलाह के लिए पत्र सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल को भेज दिया। वहां से जवाब आया कि चंडीगढ़ में राज्यसभा सदस्य की आवश्यकता नहीं है।
सोमवार को सदन की बैठक में पार्षदों ने कहा कि हमने केवल कानूनी सलाह मांगी थी लेकिन सलाह मानना जरूरी है, इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं है। इसलिए हमें सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पास कर देना चाहिए। उसके बाद भाजपा के साथ ही आम आदमी पार्टी, कांग्रेस व अकाली दल के पार्षदों ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी।
दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ में राज्यसभा सदस्य की मांग
सांसद मनीष तिवारी ने विधेयक में कहा है कि राज्यसभा के सदस्य का चुनाव चंडीगढ़ नगर निगम के निर्वाचित सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल द्वारा किया जा सकता है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली की ओर से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व किया जाता है, जबकि लद्दाख, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीव, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप का उच्च सदन में प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए चंडीगढ़ की समस्याओं को उच्च स्तर पर पहुंचाने के लिए एक सदस्य होना चाहिए।