रिपोर्ट में बताया गया था कि अवैज्ञानिक खनन हुआ है। सिंचाई विभाग की ड्रैनेज क्षतिग्रस्त कर दी गई। मंदिर को नुकसान पहुंचाया। वन क्षेत्र में अवैध खनन किया। डाडम खान में पहाड़ की कटाई नब्बे डिग्री एंगल पर कर दी गई। इसकी अनुमति होती ही नहीं है। यही कारण रहा कि इसी साल जनवरी महीने में चट्टान गिरी और पांच से अधिक मजदूरों की जान चली गई।
जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अवैध खनन के एवज में दोनों ठेकेदारों को जुर्माना राशि भरनी ही होगी। जब तक राशि जमा नहीं होगी, डाडम में खनन शुरू नहीं हो पाएगा। चूंकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 प्रतिशत राशि जमा होने के बाद ही खनन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगा। इसके साथ ही एनजीटी की तरफ से जारी अन्य हिदायतों का भी पालन करना पड़ेगा। वर्तमान ठेकेदार पर 29 करोड़ रुपये का जुर्माना सरकार ने पूर्व में लगाया था, जिसमें से 24 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है।
जुर्माना क्यों लगा ये जानना जरूरी
- 300 वर्गमीटर तक जंगल का सीना छलनी किया
- लीज क्षेत्र से बाहर ठेकेदार ने 0.8 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन किया
- नया ठेकेदार ने अपनी खनन नीति ही नहीं बनाई
- हरसेक हिसार की रिपोर्ट अनुसार सतह से 78 मीटर नीचे तक ही खनन की अनुमति, 109 मीटर तक कर दिया गया, कहीं 200-250 मीटर नीचे तक भी खुदाई हुई
ठेकेदारों के सामने हाईकोर्ट विकल्प
एनजीटी के जुर्माना लगाने के खिलाफ दोनों ठेकेदार के सामने अब हाईकोर्ट जाने का ही विकल्प बचा है। जुर्माना राशि अधिक होने को ठेकेदार चुनौती दे सकते हैं। पूर्व में हुई कार्रवाई के खिलाफ भी ठेकेदार हाईकोर्ट का रुख कर चुके हैं।