वीसी प्रो. राज कुमार
प्रो. राज कुमार ने सोमवार शाम करीब सवा छह बजे पीयू के वाइस चांसलर का पदभार संभाल लिया। पद संभालने के बाद उन्होंने खुशी जाहिर की है। इस दौरान पीयू के अधिकारियों, सीनेट और सिंडीकेट के मेंबरों, टीचिंग स्टाफ ने उन्हें बधाई दी। शहर के 11 कालेजों से प्रोफेसर और प्रिंसिपल भी उन्हें बधाई देने पहुंचे। ज्वाइनिंग के दौरान पीयू की सिक्योरिटी व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
वीसी का पद संभालने के बाद वह मीडिया से भी मुखातिब हुए और कहा कि पीयू का वीसी बनना मेरे लिए गर्व की बात है। पीयू के अस्तित्व को बचना और उसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना, मेरी पहली प्राथमिकता है। मेरा मुख्य उद्देश्य रिसर्च के क्षेत्र में पीयू को नई ऊंचाई पर ले जाना है। पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टाफ से साथ मिलकर काम करूंगा। मेरे और स्टाफ के बीच कभी कम्युनिकेशन गैप नहीं होगा।
हम सभी विभागों के प्रोफेसरों साथ मिलकर पंजाब यूनिवर्सिटी की बेहतरी के लिए काम करेंगे। हालांकि उनसे जब यह सवाल पूछा गया कि जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसा माहौल पीयू में न बन जाए। आरोप लग रहा है कि आप आरएसएस के वीसी हैं तो उन्होंने मुस्कुराते सवाल टाल दिया और जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने अच्छी दिशा में काम करने की बात कही।
कहा कि पीयू के विकास के लिए हर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा पंजाब यूनिवर्सिटी में तीन साल का कार्यकाल है। मैं रिसर्च, फंड सहित सभी क्षेत्रों के विकास के लिए काम करूंगा। मीडिया से बातचीत के दौरान सीनेट सदस्य व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन उनके साथ मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने सवालों से वीसी का बचाव भी किया।
ज्वाइनिंग की सूचना मिलते ही व्यवस्था हो गई चाक-चौबंद
प्रो. राज कुमार
नवनियुक्त वाइस चांसलर के सोमवार को ही पदभार संभालने की सूचना मिलते ही दोपहर में यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी स्टाफ, अफसर और कर्मचारी मुस्तैद हो गए। दोपहर बाद 2.30 बजे से ही वीसी गेस्ट हाउस के बाहर पीयू के प्रोफेसर्स, सीनेट मेंबर्स पहुंचने लगे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष संजय टंडन भी पहुंच गए। वीसी के पहुंचने पर पीयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर प्रोफेसर अश्विनी कौल, पीयू के रजिस्ट्रार गुरजीत सिंह चड्ढा, पीयू परीक्षा नियंत्रक परविंदर सिंह ने उनका स्वागत किया।
नए वीसी के सामने यह चुनौतियां
पीयू के नए वीसी के सामने कई चुनौतियां है। विश्वविद्यालय में सातवां वेतन आयोग लागू करना बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का फंड चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से यह फंड लाना सबसे बड़ी चुनौती है। पीयू को केंद्र से मिलने वाली फंडिंग कम है। इस कारण यहां पर सातवां वेतन आयोग लागू नहीं हो पाया है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीनेट मेंबर्स को साथ लेकर चलना है। छात्र संघ का सफल चुनाव करना भी एक बड़ी चुनौती है।
बीमा, पूंजी बाजार और उद्यमिता के क्षेत्र में नए वीसी की खास पकड़
बता दें कि डा. राज कुमार की नियुक्ति चांसलर व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने किया है। चांसलर ऑफिस की ओर से बीते शनिवार को इस संबंध में पीयू के रजिस्ट्रार को आधिकारिक पत्र भेजा गया था। पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर का कार्यकाल 22 जुलाई को खत्म हो गया। नए वीसी के लिए 169 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से शॉर्ट लिस्ट किए गए 10 उम्मीदवारों का इंटरव्यू 17 जुलाई को उक्त तीन सदस्यीय कमेटी ने जेएनयू दिल्ली में लिया था। बीएचयू के प्रोफेसर डा. राज कुमार को 35 साल के शिक्षण और अनुसंधान का अनुभव है।
बीमा, पूंजी बाजार और उद्यमिता के क्षेत्र में उनकी खास पकड़ है। मानव मूल्यों, नीति शास्त्र जैसे समकालीन मुद्दों पर भी उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने चार पुस्तकें भी लिखीं हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, सम्मेलन और कार्यशालाओं में वह बढ़चढ़ कर भाग लेते रहे हैं। साथ ही उन्होंने छह शोध परियोजनाएं पूरी की हैं।रिफ्रेशर कोर्स, उद्यमी विकास कार्यक्रमों का आयोजन भी उन्होंने किया है।