अजनाला हमले के बाद से खाली पड़ा केंद्र
एसपी तेजबीर सिंह भी उस टीम में शामिल हैं जो अमृतपाल के सारे मामले की अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रही है। यह नशा मुक्ति केंद्र अमृतपाल के लिए फंड इकट्ठा करने का साधन था। इसकी जांच भी एजेंसियां कर रही हैं। अमृतपाल के भूमिगत होने से उसकी गिरफ्तारी तक इस केंद्र में कोई भी युवा नहीं है। अजनाला घटना के बाद से ही युवक यहां से चले गए थे। इस नशा केंद्र को अमृतपाल सिंह मोगा में गांव जोगेवाला के गुरुद्वारा साहिब में शिफ्ट करना चाहता था ताकि इसके नाम तले और अधिक फंड जुटाया जा सके।
एसपी तेजबीर सिंह का कहना है कि गांव जल्लूपुर खेड़ा के गुरुद्वारा के पास अमृतपाल की जत्थेबंदी की ओर से जो नशा मुक्ति केंद्र बनाया गया था वो रजिस्ट्रर्ड भी नहीं था। जबकि किसी तरह का भी नशा मुक्ति केद्र खोलने के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मापदंड पूरे किए जाते है। इस सेंटर में न कोई क्वालीफाइड डाक्टर था, ना ही कोई स्टाफ, न कोई मनोरोग डाक्टर, न ही काउंसिलर और न ही पैरामेडिकल स्टाफ आदि की कोई व्यवस्था था। बैड व दवाओं की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। जो युवा आते थे, वह नीचे दरियों पर ही सोते थे।