हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल कांड को लेकर अलग हकीकत बयान कर रही हरियाणा पुलिस की धज्जियां पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में उड़ रही हैं। मुरथल कांड के मीडिया में आने के बाद जिन पुलिस अधिकारियों ने मुरथल हिंसा को लेकर सरकार को सब कुछ ठीक ठाक होने की रिपोर्ट दी थी, उनके बयानों की कलई भी हाईकोर्ट में खुल रही है।
झज्जर डीसी अनीता यादव की हाईकोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। सेशन जज झज्जर एएस नारंग समेत कुछ अन्य सेशन जजों ने भी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा है कि जजों को अपनी सुरक्षा के लाले पड़ गए थे। कुछ एक को तो अपने ही घर से इमरजेंसी में बच कर निकलने केलिए रास्ता बनाना पड़ा। यहां तक कि एक महिला जज की सास का देहांत हो गया था और वह बिना सुरक्षा के थीं। उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा।
एक सिविल जज जूनियर डिवीजन ने रिपोर्ट दी है कि उनका घर रोहतक एमडीयू के पास है। जब वे अपने ऑफिस से निकले तो गाड़ी से घर जाने लायक हालात नहीं थे। इसके बाद वे जैसे-तैसे बाइक लेकर अपने घर गए और अपने बेटे को लेकर सुरक्षित ठिकाने के लिए निकले। करीब 250 किलोमीटर तक 12 घंटे सफर करने के बाद उन्हें सुरक्षित ठिकाना हासिल हुआ।
पुलिस की कार्यशैली से आंदोलनकारियों को और बल मिला
मुरथल गैंगरेप केस
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इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की हालत कितनी पतली हो गई, इसका खुलासा झज्जर की उपायुक्त अनीता यादव की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल रिपोर्ट स्वयं बयान करती है। पहले उन्होंने हाईकोर्ट में पेश होकर हालात जुबानी बयान किए थे, लेकिन जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने उनसे शपथ पत्र के माध्यम से रिपोर्ट देने को कहा था।
जाट आंदोलन और मुरथल में कथित गैंगरेप केस की सुनवाई के दौरान यादव ने हाईकोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में जहां एसपी झज्जर सुमित कुमार को डरपोक बताया, वहीं झज्जर में हालात बिगड़ने के लिए भी उन्हें ही सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
आंदोलन के दौरान जिले में बिगड़ी कानून व्यवस्था संबंधी रिपोर्ट में उपायुक्त ने कहा कि पुलिस स्वयं भयभीत हो गई थी। एसपी सुमित कुमार ने झज्जर के सभी थानों और पुलिस चौकियों को निर्देश दे दिया था कि वह थानों में पड़ा असलहा, हथियार एवं वायरलेस सेट आदि लेकर पुलिसकर्मी पुलिस लाइन में चले जाएं।
इस तथ्य के साथ यादव ने एसपी पर निशाना साधते हुए रिपोर्ट में कहा कि एसपी हालातों पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह विफल रहे। रिपोर्ट में कहा कि थाने लोगों के लिए सुरक्षित स्थान हैं, लेकिन पुलिस स्वयं ही भयभीत हो गई थी। रिपोर्ट में उपायुक्त ने कहा कि पुलिस की इस कार्यशैली से आंदोलनकारियों को और बल मिला और इससे हालात और बिगड़े।
हालात बेकाबू होने को लेकर उपायुक्त ने बड़ा खुलासा
जाट आंदोलन
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मना करने के बावजूद एसपी रोहतक चले गए
उपायुक्त ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जिस वक्त हालात बेकाबू हो रहे थे, उस वक्त एसपी और दो डीएसपी पांच सौ पुलिसकर्मियों की फोर्स लेकर रोहतक चले गए, हालांकि ऐसा करने से रोका भी गया। यह भी बताया कि रोहतक में यह फोर्स आईजी रोहतक के कहने पर झज्जर से गई, जबकि झज्जर में अतिरिक्त पुलिस बल मुहैया नहीं कराया गया। इस संबंधी रोहतक के कमिश्नर को फोन पर बता भी दिया गया था।
कहा कि झज्जर में 20 फरवरी की शाम तक केवल 463 पुलिसकर्मी ही रह गए थे। उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि पुलिस बल की कमी के कारण वह स्वयं आंदोलनकारियों को समझाने गईं। एसपी झज्जर पहुंच भी गए थे, लेकिन कैंप में आईजी के साथ ही मंत्रणा करते रहे। रिपोर्ट में यह भी कहा कि पुलिस की कमी के बावजूद जिले की ज्यूडिशयरी को सुरक्षा मुहैया कराई गई।
एमाइक्स क्यूरी ने बयान की दबंगई
जाट आंदोलन के दौरान हिंसक घटनाओं एवं मुरथल में कथित गैंगरेप के केस में एमाइक्स क्यूरी लगाए गए सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने मुरथल में हुई दबंगई बयान की। उन्होंने बेंच को बताया कि पंजाब राजभवन कर्मचारी की रिश्तेदारों से मुरथल में दुष्कर्म होने की जानकारी उन्हें प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा कि पीड़ित इसलिए सामने नहीं आ रहे, क्योंकि पीड़िताओं की शादी अभी होनी है। उन्होंने कहा कि जब ऐसी जानकारी उन्हें मिल सकती है तो पुलिस को क्यों नहीं। हालांकि बेंच ने आईजी ममता सिंह की जांच पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन एमाइक्स क्यूरी से कहा कि जो भी तथ्य सामने आए वह एसआईटी से शेयर करें। एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब की गई है।