स्टॉकों की जमानत के तौर पर इस वर्ष मिल मालिकों को बढ़ी हुई बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ेगी, जो कि बीते वर्ष 5000 मीट्रिक टन पर 5 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 3000 मीट्रिक टन से अधिक मात्रा के अलॉट होने योग्य मुफ्त धान की खरीद कीमत के 10 प्रतिशत के बराबर होगी। बैंक गारंटी जमा करवाने के लिए शुरुआती हद कम करने के साथ 1000 से अधिक और मिलें सीधी निगरानी के अंतर्गत आ जाएंगी।
150 मीट्रिक टन करनी होगी खरीद
नई नीति के तहत एक मिलर को अपने खाते में 150 मीट्रिक टन कम-से-कम धान की फसल खरीदनी होगी, या उसे न वापस करने पर 5 लाख रुपए की रकम खजाने में जमा करवानी पड़ेगी। इसके अलावा 5 लाख रुपए की और रकम वापसी योग्य सिक्योरिटी के तौर पर पनग्रेन के खाते में ऑनलाइन जमा करवानी होगी।
नहीं हो पाएगा धान का और इस्तेमाल
नई नीति में धान की फसल के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए आरओ धान को कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है। मिल मालिकों को भंडारण किये गए पूरे धान या इसके कुछ हिस्से जिसमें आरओ धान की फसल भी शामिल होगी, के लिए प्रति मीट्रिक टन के तौर पर 125 रुपए संबंधित एजेंसी के पास जमा करवाने पड़ेंगे।
नई मिलों का आवंटन भी हुआ तय
नई नीति के तहत नई स्थापित चावल मिलों को एक टन क्षमता के लिए 3500 मीट्रिक टन धान की फसल का आवंटन किया जाएगा। 1.5 टन क्षमता बाली मिलों को 4000 मीट्रिक टन धान की फसल मिलेगी। इसके साथ ही 4500 मीट्रिक टन धान की फसल लेने के लिए 2 टन की क्षमता को जरूरी किया गया है। तीन टन की क्षमता रखने वाली मिल को 5500 मीट्रिक टन धान की फसल का आवंटन किया जाएगा। ।