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हरियाणा में डीएम से ज्यादा 'पावरफुल' होंगे एसपी

Mon, 28 Apr 2014 09:19 AM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब पुलिस रूल्स पर काम करने वाली हरियाणा पुलिस जल्द ही इन नियमों को अलविदा कहने वाली है। हरियाणा पुलिस 80 साल बाद अपने नियम बनाने जा रही है। अंग्रेजी शासन के दौरान 1934 में संयुक्त पंजाब के लिए बनाए गए ‘पंजाब पुलिस रूल्स’ पर काम कर रही हरियाणा पुलिस के लिए 2007 में हरियाणा पुलिस एक्ट भी बनाया गया था लेकिन यह एक्ट भी पुलिस रूल्स 1934 से भी प्रभावित रहा है।
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राज्य में अब ‘हरियाणा पुलिस एक्ट-2007’ को ध्यान में रखते हुए नया पुलिस कानून बनाने का फैसला किया गया है। इसके लिए जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें खास बात यह है कि नए कानून में जिलाधीश (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) की शक्तियां कम हो जाएंगी। प्रस्ताव में जिलाधीश से ज्यादा सशक्त जिला पुलिस अधीक्षक को बनाया गया है।

यहां तक कि किसी शहर की प्लानिंग तैयार करते समय जिला पुलिस अधीक्षक की राय भी ली जाएगी। इन प्रस्तावित नियमों पर विचार करने और उन्हें फाइनल करने के लिए मुख्य सचिव एससी चौधरी की अध्यक्षता में कई प्रशासनिक सचिवों की कमेटी की बैठक सोमवार को होगी। प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने भी पुलिस के प्रस्तावित नियमों पर अपनी तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार कर ली है।
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नए कानून में ऐसे घटेंगी जिलाधीश की शक्तियां

- यातायात प्रबंधन टास्क फोर्स का मुखिया जिला पुलिस अधीक्षक होगा। उपायुक्त का प्रतिनिधि, डीएफओ, नगर निगम का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी, डीटीपी और एस्टेट अफसर हुडा सदस्य होंगे। वास्तव में टास्क फोर्स का अध्यक्ष जिलाधीश होना चाहिए।
- जिला पुलिस अधीक्षक अगर जिला छोड़ते हैं तो जिलाधीश को सूचना नहीं देंगे। पहले जिलाधीश को सूचना देने का प्रावधान है।
- भीड़ पर काबू पाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभी तक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति का प्रावधान है मगर अब पुलिस बल प्रयोग करने के लिए पुलिस को स्वतंत्र शक्ति देने का प्रावधान बनाया जा रहा है।
- यह प्रावधान किया जा रहा है कि अगर भीड़ नियंत्रित करने के लिए गोली चलाई गई तो मृतकों, घायलों को अस्पताल भिजवाने का जरूरी प्रबंध कार्यकारी मजिस्ट्रेट करेंगे।

- सड़कों, गलियों के प्रयोग को रेगुलेट करने की शक्ति पुलिस को देने का प्रस्ताव है जबकि यह सामान्य तौर पर नगर निगम के पास होता है।

- सार्वजनिक मनोरंजन के लिए चल रहे सिनेमा हॉल को रेगुलेट करने की शक्ति भी पुलिस को देने का प्रावधान है जबकि सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत यह अधिकारी जिलाधीश के पास है।

- भीड़ को एक स्थान पर इकट्ठा होने से रोकने के लिए धारा-144 लगाने का अधिकार जिलाधीश के पास है, लेकिन प्रस्तावित रूल्स में यह अधिकार पुलिस को देने का प्रावधान है और लोगों से 500 रुपये फीस वसूलने का प्रावधान किया जा रहा है।
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जिलाधीश होता है सभी मामलों में जिले का मुखिया, लेकिन....

अंग्रेजों के समय में बने नियमों के तहत जिलाधीश कानून व्यवस्था समेत सब मामलों में जिले का मुखिया होता है। यहां तक कि पुलिस बल का मुखिया भी जिलाधीश ही होता है ताकि कानून व्यवस्था बेहतर ढंग से चलाई जा सके।

इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय जिलाधीश पुलिस थानों की जांच कर सकते हैं। हालांकि वे इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखते हैं कि पुलिस अथॉरिटी कमजोर न होने पाए। मगर नए नियमों में इसे बदल दिया गया है।

सेक्शन-4 में प्रावधान किया गया है कि जिलाधीश के क्षेत्र में पुलिस प्रशासन का कंट्रोल और निर्देशन जिला पुलिस अधीक्षक के पास रहेगा।

जिला स्तरीय को-आर्डिनेशन कमेटी का मुखिया जिलाधीश है मगर नए नियमों में जिला पुलिस अधीक्षक को मुखिया बनाया गया है और जिलाधीश का प्रतिनिधि सदस्य होगा।
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