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जानिए क्या छिड़ा पीयू में नया विवाद..

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में इस समय एक नया मुद्दा शिक्षकों के बीच छिड़ा हुआ है। बहस इस पर चल रही है कि पीयू को शोध पहले चाहिए या फिर ऊष्मायन केंद्र (इंक्यूबेशन सेंटर)। बड़ी संख्या में शिक्षक शोध के पक्षधर हैं। वहीं कुछ शिक्षक ऊष्मायन केंद्र के पक्ष में हैं। आखिर पीयू इसका हल कैसे निकालेगी, इसका किसी को कोई आभास नहीं है। सोशल मीडिया पर बने ग्रुपों पर भी यह बहस चल रही है।
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रूसा के तहत पंजाब विश्वविद्यालय ने पिछले साल केंद्र सरकार से शोध आदि के लिए पैसे की मांग की थी। लगभग 110 शोध परियोजनाएं (रिसर्च प्रोजेक्ट) शिक्षकों ने बनाई थीं, जो केंद्र सरकार को निधि (फंड) जारी के लिए भेजी गई थीं।
केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट पास कर दिया और पहले चरण में लगभग पांच करोड़ रुपये पंजाब विश्वविद्यालय के खजाने में भेज दिए। इस रकम से पहले कौन-सा कार्य होगा? इसका निर्धारण पीयू ने किया। पीयू ने ऊष्मायन केंद्र बनाने का निर्णय लिया और साउथ कैंपस में उसके निर्माण की तैयारी चल रही है। वहीं शिक्षकों ने कहा है कि पीयू के जिन शिक्षकों की शोध परियोजनाएं मंजूर हुई हैं, पहले उसके लिए रकम आवंटित की जानी चाहिए थी। भले ही थोड़ी-थोड़ी मिलती, लेकिन देनी चाहिए थी। ऊष्मायन केंद्र को आखिर चरण में शुरू किया जाना चाहिए था।
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ये है शिक्षकों की राय
नाम न छापने की शर्त पर कुछ शिक्षकों ने बताया कि रूसा के तहत मिले बजट में केंद्र सरकार ने यह नहीं लिखा है कि पहले चरण में जो राशि दी जा रही है, वह ऊष्मायन केंद्र के निर्माण के लिए दी जा रही है। वह कुल परियोजना की पहली किस्त है। उसका उपयोग पीयू को शोध के लिए करना चाहिए था। शिक्षकों का तर्क है कि शोध के लिए बजट मिलता तो शोध शुरू होता और उसका देश व दुनिया को लाभ मिलता। इससे समाज आगे बढ़ता। साथ ही शोध परियोजनाओं के जरिए रोजगार के रास्ते भी खुलते। शोध को बढ़ाने से पीयू की रैंक भी बेहतर होती। शिक्षकों का कहना है कि पीयू को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ शिक्षकों की राय है कि ऊष्मायन केंद्र की स्थापना से रोजगार के रास्ते खुलेंगे और युवाओं के विचारों को पंख लगेंगे।
क्या है ऊष्मायन केंद्र
स्टार्टअप व्यवसाय को विकसित करने में मदद करने वाले संस्थानों को ऊष्मायन केंद्र कहा जाता है। ये केंद्र प्रारंभिक चरण में स्टार्टअप्स के लिए संजीवनी के सामान होते हैं। यह संस्थान आम तौर पर स्टार्टअप्स को व्यापारिक एवं तकनीकि सुविधाओं, सलाह, प्रारंभिक विकास निधि नेटवर्क और संबंध, सहकारी रिक्त स्थान, प्रयोगशाला की सुविधा, सलाह और सलाहकार समर्थन जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। शुरुआती चरण में ऊष्मायन केंद्र स्टार्टअप के लिए एक शिक्षक की भूमिका निभाता है।
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