फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़: पीजीआई में भाई-भतीजावाद, चौंकाने वाले खुलासे

Tue, 31 Mar 2015 05:53 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पीजीआई में भाई-भतीजावाद कोई नई बात नहीं है। संस्थान में पहले भी डॉक्टरों के सगे संबंधी नियुक्त होते रहे हैं। कई तो ऐसे हैं, जो एक ही डिपार्टमेंट में काम करते हैं। संस्थान से जुड़े लोगों का ही दावा है कि पीजीआई में 30 से ज्यादा फैकल्टी मेंबरों के रिश्तेदार पीजीआई के अलग-अलग विभागों में कार्यरत हैं।
विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों के हिसाब से जांच की जाए तो यह संख्या और ज्यादा हो सकती है। अमर उजाला डॉक्टरों और उनके रिश्तेदारों की नियुक्तियों पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा है, सिर्फ संस्थान की एक तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहा है। वह भी तब, जब पीजीआई एंटी क्रप्शन फ्रंट की ओर से ही प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को डायरेक्टर के रिश्तेदारों से जुड़े मामले में शिकायत की गई है।

सलेक्शन कमेटी में होते हैं पीजीआई के डाक्टर
एडहॉक पर रखे जाने वाले डॉक्टरों को नियुक्त करने में स्क्रूटनी और सलेक्शन कमेटी बनाई जाती है। आमतौर पर इस कमेटी में पीजीआई के डॉक्टर और सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर होते हैं। कमेटी जो नाम फाइनल करती है, उस पर मुहर कमेटी के चेयरमैन और पीजीआई के डायरेक्टर मुहर लगाते हैं।
विज्ञापन


इसी तरह से जब कोई स्थायी नियुक्ति होती है तो उसके लिए बाहर से एक्सपर्ट आते हैं। एक्सपर्ट जो नाम तय करते हैं, उस पर भी मुहर लगाने का काम काफी हद तक डायरेक्टर का ही होता है। सारा खेल इसी में होता है।
विज्ञापन

जिसे रिजेक्ट किया, उसी को नियुक्ति दी

पीजीआई के पूर्व कार्डियोलाजिस्ट डॉ. एचके बाली के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था। सलेक्शन कमेटी ने उनका नाम फाइनल कर दिया था, लेकिन अप्वाइंटमेंट लेटर उस कैंडिडेट को दे दिया गया था, जिसे कमेटी ने रिजेक्ट कर दिया था। बाली ने इस भाई-भतीजावाद के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पहले लोकल कोर्ट, फिर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। आखिरकार कोर्ट ने फेल कैंडिडेट का अप्वाइंटमेंट कैंसिल कर डॉ. बाली को नियुक्त करने के आदेश दिए।

पेशेंट केयर पर पड़ता है असर
एक संस्थान में इतने सारे रिश्तेदार होने पर इसका पेशेंट केयर पर असर पड़ना तो लाजिमी है। यदि घर में कोई कार्यक्रम है तो एक साथ दोनों ही छुट्टी लेंगे। यदि रिश्तेदार महिला है और उन्हें कांफ्रेंस के लिए बाहर जाना है तो दोनों एक साथ ही जाएंगे। इससे कहीं न कहीं पेशेंट केयर पर असर तो जरूर पड़ता है।

कुछ प्रमुख नाम, जिनके संबंधी पीजीआई में कार्यरत हैं
नाम--------------विभाग------------पद
1. आसिमदास--हिस्टोपैथोलाजी----प्रोफेसर
2. के गाबा----ओरल हेल्थ-----प्रोफेसर
3. ए चक्रबती---फार्माकोलाजी---एचओडी व प्रोफेसर
4. संजय जैन---इंटरनल मेडिसिन---प्रोफेसर
5. विवेक लाल---न्यूरोलाजी---प्रोफेसर व एचओडी
6. अनीष भट्टाचार्य-न्यूक्लियर मेडिसिन-ए.प्रोफेसर
7. पल्लब रे--मेडिकल माइक्रोबायोलाजी--प्रोफेसर
8. सुनीत सिंघी--पीडियाट्रिक मेडिसिन--प्रोफेसर
9. एसके गुप्ता-- न्यूरोसर्जरी------प्रोफेसर
(नोट: हम इनके सलेक्शन पर कोई सवाल नहीं उठा रहे।)

कोई भी मंत्री अपने रिश्तेदार को मंत्रालय में नहीं रखेगा और न ही कोई पर्सनल पीए या अन्य विभाग में।- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
(शपथ लेने के बाद जब मोदी ने कार्यभार संभाला था, उस दौरान उन्होंने अपने मंत्रियों को ये निर्देश दिए थे)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें