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पानीपत का मामला: लापरवाही की वजह से नवजात की जान गई फिर प्रसूता को भी जोखिम में डाला, तीन घंटे में कर दिया डिस्चार्ज

Mon, 11 Oct 2021 12:14 PM IST
ajay kumar सोमदत्त, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा के पानीपत सिविल अस्पताल में लापरवाही की वजह से नवजात की जान चली गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी बात की गई लेकिन कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि ऐसा कोई भी घटनाक्रम हो तो मंत्री जी से बात की जाए, जबकि जवाबदेह अधिकारी हैं। मंत्री किसी अधिकारी को किसी प्रकरण पर बोलने से मना नहीं करते।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पानीपत के सिविल अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही से पहले तो एक शिशु की जान चली गई। सिस्टम की लापरवाही यहीं तक नहीं रही अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया। बच्चे के जन्म के तीन घंटे बाद ही जच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ऐसा इसलिए किया गया कि अस्पताल प्रबंधन पर कोई आंच न आए। 

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नियमों के मुताबिक डिलीवरी के दौरान माताओं और शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से मानदंड तय किए गए हैं। इसके तहत यह अनिवार्य है कि डिलीवरी के बाद प्रसूता को 48 घंटे तक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। 

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विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनल ब्लीडिंग से महिलाओं को दिक्कत आ जाती है। कई बार हालात इतने खराब होते हैं कि अगर तुरंत मेडिकल सहायता नहीं मिले तो महिला की जान भी जा सकती है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर एक हजार पर 91 और शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार जीवित जन्म पर 30 है। सरकार मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए तमाम कार्यक्रम चला रही है लेकिन जमीनी स्तर पर निर्धारित नियमों तक का पालन नहीं हो रहा है। 

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पति ने लगाई न्याय की गुहार

पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर का कहना है कि डॉ. अमित को जांच सौंपी है। रिपोर्ट के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी। उधर, पानीपत निवासी महिला के पति सोनू ने न्याय की गुहार लगाई है। सोनू का कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार डॉक्टर और नर्स पर कार्रवाई की जाए।

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यह है मामला
पानीपत की अग्रवाली मंडी निवासी ज्योति को गुरुवार प्रसव पीड़ा हुई तो उसे सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। जब महिला बेड पर बैठी तो मदद के लिए कराह रही थी तो किसी नर्स ने उसकी मदद नहीं की और उसकी डिलीवरी हो गई। साढ़े छह माह का प्री-मेच्योर बच्चा नीचे रखे डस्टबिन में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके तीन घंटे के बाद ही महिला को अस्पताल ने डिस्चार्ज कर दिया। शुक्रवार को महिला का पति विधायक प्रमोद विज से मिला और पूरा घटनाक्रम बताया तो विधायक के कहने के बाद महिला को दोबारा से दाखिल किया गया।

अभी संज्ञान में आया मामला, गलती पर होगी कार्रवाई
यह मामला मेरे संज्ञान में अभी आया है। अगर इस तरह की लापरवाही है तो इसकी पूरी जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। - अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा।
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