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एनसीबी निदेशक अस्थाना फिर विवादों में, दंत चिकित्सक ने लगाए आरोप, चंडीगढ़ पुलिस भी फंसी

Sat, 10 Oct 2020 10:45 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • पूर्व डीजीपी से मिल डॉक्टर पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का आरोप
  • चंडीगढ़ पुलिस की किसी भी कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
  • गृह सचिव, डीजीपी, पंजाब के गृह सचिव व अन्य को नोटिस
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एनसीबी निदेशक राकेश अस्थाना - फोटो : PTI
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विस्तार
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एनसीबी निदेशक राकेश अस्थाना और चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी तजिंदर लूथरा पर अवैध वसूली के लिए चंडीगढ़ पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के गृह सचिव, डीजीपी, पंजाब के गृह सचिव व अन्य को नोटिस जारी कर चंडीगढ़ के दंत चिकित्सक डॉ मोहित धवन के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस की किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
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दंत चिकित्सक डॉ. मोहित धवन ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक गार्टरूड डिसूजा ने ई-मेल के माध्यम से उनसे इलाज के लिए संपर्क किया। 12 अगस्त 2017 को डिसूजा के दांतों की सर्जरी हुई। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि सर्जरी के बाद महिला ने बकाया फीस का भुगतान नहीं किया और धमकी दी कि वह राकेश अस्थाना की करीबी हैं, पैसा मांगना महंगा पड़ेगा।

इसके बाद वह अमेरिका चली र्गइं। डॉक्टर ने बताया कि गार्टरूड डिसूजा के अमेरिका जाने के बाद चंडीगढ़ पुलिस बार-बार उनके क्लीनिक का चक्कर लगाने लगी और महिला द्वारा दी गई फीस वापस मांगने लगी। डॉ धवन ने कहा कि एक बार पुलिस उनको डीजीपी कार्यालय ले गई और वहां डीजीपी लूथरा की मौजूदगी में विवाद निपटारे के नाम पर उनसे 50 लाख रुपये की मांग की।
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शिकायत पर विशेष सरकारी वकील नियुक्त

याची ने बताया कि जब वह पैसे देने के लिए तैयार नहीं हुआ तो 19 मार्च 2018 को उसके खिलाफ धोखाधड़ी का झूठा केस दर्ज कर दिया गया। डॉ. धवन ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस शिकायत प्राधिकरण से शिकायत की तो चेयरमैन एमएस चौहान ने पुलिस से मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे।

पुलिस ने चेयरमैन के आदेश का पालन नहीं किया तो चौहान ने इस्तीफा दे दिया और मामला प्रशासक को भेज दिया। याची का कहना है कि उन्होंने राकेश अस्थाना, डीजीपी लूथरा और अन्य के खिलाफ जो शिकायत दी थी, उन्हें बचाने के मकसद से नियमों को ताक पर रख मामले में विशेष सरकारी वकील नियुक्त कर दिया गया।

पीएमओ, सीवीसी और सीबीआई को दी शिकायत
डॉ धवन का कहना है कि जब सारे प्रयास विफल रहे तो उसने पीएमओ, सीवीसी और सीबीआई को शिकायत दी। 10 दिसंबर 2019 को सीबीआई ने विजिलेंस को जांच दी और पीएमओ ने 13 अगस्त 2020 को प्रशासक को शिकायत पर कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए उस पर दबाव बनाना शुरू किया।

25 सितंबर 2018 की एक शिकायत को आधार बना 21 सितंबर 2020 को एफआईआर दर्ज करवा दी। याची ने हाईकोर्ट से मांग की है कि अब इस मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस के अतिरिक्त किसी अन्य एजेंसी या पंजाब पुलिस से कराई जाए। साथ ही यह मांग भी की है कि मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा है, इसलिए यह जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में हो।
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