सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी न छोड़ते हुए केवल प्रदेश अध्यक्ष पद से ही इस्तीफा दिया है लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि चन्नी को मुख्यमंत्री बनवाने में जो अहम भूमिका उन्होंने निभाई थी, उसी का परिणाम था कि वह विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में चन्नी का हाथ पकड़े उन्हें अपने साथ लेकर चलते दिखाई दे रहे थे लेकिन ऐसा ज्यादा दिन चल नहीं सका और चन्नी ने राज्य के डीजीपी, एडवोकेट जनरल के पदों पर नियुक्ति में सिद्धू की सलाह को नजरअंदाज कर दिया।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसके बाद गृह विभाग सुखजिंदर सिंह रंधावा को सौंपने के साथ ही सिद्धू ने मान लिया कि चन्नी सरकार में उनकी नहीं चलेगी। दरअसल, विधायक दल के नेता के रूप में पूर्व पार्टी प्रधान सुनील जाखड़ को दौड़ से बाहर करने के बाद रंधावा ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था। इस कारण सिद्धू अपना दावा पेश करने से चूक गए फिर भी उन्होंने रंधावा को साइडलाइन करते हुए चन्नी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था।
सिद्धू ने इस्तीफे में यह लिखा
अंग्रेजी में अपने लैटरहेड पर लिखे इस्तीफा पत्र में सिद्धू ने लिखा- वह पंजाब की भलाई और पंजाब के भविष्य के एजेंडे के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं कर सकते। समझौते से ही आदमी का पतन शुरु होता है। इसलिए मैं प्रदेश कांग्रेस प्रधान के तौर पर इस्तीफा दे रहा हूं। मैं कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा।
मैंने पहले कहा था, सिद्धू स्थिर व्यक्ति नहीं है: कैप्टन
नवजोत सिद्धू के इस्तीफे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा कि मैंने आपको पहले ही कहा था कि वह (नवजोत सिद्धू) एक स्टेबल (स्थिर) आदमी नहीं है और वह सरहदी राज्य पंजाब के अनुकूल नहीं है।