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पंजाब कांग्रेस का लखीमपुर कूच: यूपी सीमा पर नवजोत सिंह सिद्धू को रोका, रात में मिली 20 लोगों को जाने की इजाजत

Thu, 07 Oct 2021 01:18 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नवजोत सिद्धू ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि वे इंसाफ के लिए अपनी देह त्यागने को भी तैयार हैं।
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लखीमपुर खीरी के लिए रवाना होते नवजोत सिद्धू और सीएम चन्नी।। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी घटना के विरोध में गुरुवार को सामाजिक न्याय यात्रा निकालकर पीड़ितों से मिलने जा रहे पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के काफिले को सहारनपुर के सरसावा में रोक लिया गया। इससे गुस्साए काफिले में शामिल कांग्रेसियों व यूपी पुलिस के मुलाजिम से धक्का-मुक्की भी हुई। तनाव बढ़ने पर पुलिस ने सिद्धू, कैबिनेट मंत्री अमरिंदर सिंह उर्फ राजा वडिंग सहित 15 लोगों को हिरासत में ले लिया।

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कई दौर की बातचीत के बाद रात करीब साढ़े आठ बजे प्रशासन ने सिद्धू सहित 20 लोगों लखीमपुर जाने की इजाजत दे दी। सिद्धू पटियाला से अपने समर्थकों के साथ लखीमपुर रवाना हुए थे। इस दौरान उनके साथ मंत्री राजा वडि़ंग, परगट सिंह, राजकुमार वेरका, विजय इंदर सिंगला, विधायक मदनलाल जलालपुर व पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान वरिंदर सिंह ढिल्लों सहित काफी लोग मौजूद रहे। जब उनका काफिला हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा के पास पहुंचा तो पहले से यूपी पुलिस खड़ी थी। पुलिस ने सिद्धू का काफिला सहारनपुर के पास रोक लिया। 

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पुलिस ने पूरे काफिले को प्रवेश की अनुमति न देते हुए केवल पांच लोगों को लखीमपुर तक जाने की इजाजत देने की बात कही लेकिन सिद्धू और बाकी नेता एक साथ जाने की जिद पर अड़ गए और उन्होंने बॉर्डर पर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस वर्करों ने सहारनपुर पुलिस द्वारा बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके कारण पुलिस और कांग्रेस वर्करों में धक्कामुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने सिद्धू समेत 15 लोगों को हिरासत में लेकर सरसावा थाने ले आई। जबकि विरोध में उनके समर्थक वहीं बैठ गए। बाद में प्रशासन ने 20 लोगों को लखीमपुर जाने की इजाजत दे दी। उसके बाद कैबिनेट मंत्री राजा वडिंग ने वापस शाहजहांपुर चौकी पर पहुंचकर समर्थकों से पंजाब वापस लौटने को कहा। 

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सिद्धू और चन्नी साथ-साथ
पंजाब कांग्रेस के काफिले को भले ही सहारनपुर में रोक कर लिया गया लेकिन विशेष बात यह रही कि इस काफिले के एक वाहन पर नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी साथ-साथ दिखाई दिए। दोनों नेता केंद्र और यूपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते दिखाई दिए। मुख्यमंत्री चन्नी ने कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ाया और न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। हाल ही में मुख्यमंत्री चन्नी द्वारा की गई अफसरों की नियुक्तियों के विरोध में सिद्धू ने प्रदेश प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चन्नी के साथ उनकी सुलह बैठक भी हुई लेकिन मनमुटाव आज तक बना हुआ है। ऐसे हालात में दोनों नेताओं का एक साथ नजर आना हैरान करने वाला है।
 

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रोष मार्च के कारण जाम हुआ जीरकपुर

पंजाब कांग्रेस की तरफ से लखीमपुर खीरी तक निकाले जा रहे रोष मार्च के कारण जीरकपुर में जाम लग गया। पार्टी के नेता नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ से कांग्रेसी वर्करों को सुबह दस बजे का समय दिया गया था। सुबह दस बजे तक यहां बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता और वर्करों की भीड़ एकत्रित हो गई थी। जबकि सिद्धू अपने निजी काफिले के साथ दोपहर साढ़े बारह बजे पहुंचे। इसके अलावा करीब एक बजे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अलग से अपने काफिले के साथ पहुंचे। इसके कारण जीरकपुर की सड़कों पर जाम लग गा।

सुबह दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक जीरकपुर में भारी जाम रहा। मौके पर हवाई अड्डे की लाइटों से बनूड़, मोहाली एयरपोर्ट चौक, जीरकपुर पंचकूला सड़क व चंडीगढ़ अंबाला मुख्य मार्ग पर मैकडोनल्डस चौक तक वाहनों की कतारें लगी हुई थी। जिस कारण राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

पांच मिनट का सफर तय करने को वाहन चालकों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा। एसएसपी मोहाली नवजोत सिंह मेहल, एसपी देहाती रवजोत कौर ग्रेवाल और डीएसपी मोहाली गुरप्रीत सिंह बैंस ट्रैफिक प्रबंधों को काबू करने में जुटे थे लेकिन मौके पर हालात काफी खराब हो गए थे। दोपहर बाद तकरीबन दो बजे जब काफिला यहां से निकला तब जा कर पुलिस ने राहत की सांस लेते हुए यातायात सुचारू करवाया।
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