श्रमजीवी कार्यकर्ता नौदीप कौर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि नौदीप ने हमला किया या उगाही यह तय करना ट्रायल कोर्ट का काम है। हालांकि हाईकोर्ट ने याची को स्वयं को सीमित रखने की नसीहत भी आदेश में दी है।
नौदीप कौर मामले में बुधवार को स्वत: संज्ञान लेकर जमानत याचिका पर सुनवाई आरंभ हुई थी। हरियाणा पुलिस ने कहा कि नौदीप कौर अन्य मजदूरों के साथ कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में एक कंपनी के बाहर एकत्रित थीं। इस दौरान कंपनी मालिक की शिकायत पर पुलिस वहां पहुंची और भीड़ को वहां से हटाने का प्रयास किया गया।
नौदीप के उकसाने पर ही मजदूरों ने हिंसा की और पुलिस पर हमले के साथ ही उनके हथियार छीनने का प्रयास भी किया। इसकी रिकॉर्डिंग भी पुलिस के पास मौजूद है। इसके बाद 12 जनवरी को नौदीप समेत अन्य पर एफआईआर दर्जकर नौदीप कौर को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी मां को गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो भी पुलिस द्वारा आरोप लगाए गए हैं उसमें कितनी सच्चाई है यह तय करना ट्रायल कोर्ट का काम है। हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन की एक सीमा होती है और उसका उल्लंघन करने से विरोध का रंग बदल जाता है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन प्रत्येक का अधिकार है लेकिन इसके साथ कुछ पाबंदियां भी हैं, जिसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।
वर्तमान में हाईकोर्ट में मुद्दा जमानत का है और उसी पर बहस होनी चाहिए। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि याची एक महिला है और उसे तो मजिस्ट्रेट भी जमानत दे सकता था। कहा गया कि पुलिस ने मामले में धारा 307 लगाई है जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। याची द्वारा ऐसा कोई वार नहीं किया गया जिससे धारा 307 लगाने की नौबत आए। हाईकोर्ट ने धारा 307 का मुद्दा भी ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया और नौदीप को जमानत दे दी। हालांकि कानून व्यवस्था न बिगड़े इसलिए हाईकोर्ट ने नौदीप को सीमित रहने का आदेश दिया है।