चंडीगढ़। सेक्टर-28 के हिमाचल भवन में बुधवार को नेशनल सिल्क एक्सपो का शुभारंभ हुआ। यह प्रदर्शनी 29 सितंबर तक चलेगी। इसमें राजस्थान का बंधेज, कोलकाता की तांत, बनारस का सिल्क, कांजीवरम की पारंपरिक बुनाई और अन्य भारतीय कला शैलियां एक साथ मौजूद हैं। एक्सपो में 80 स्टॉल में 250 प्रसिद्ध बुनकरों और डिजाइनों के परिधान लगे हैं।
प्रदर्शनी में सिल्क और कॉटन साड़ियां, कुर्तियां, फैशन ज्वेलरी, डिजाइनर ड्रेस, होम लिनन और एथनिक ड्रेसेज विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां से महिलाएं करवा चौथ की पारंपरिक साड़ी, नवरात्रि की गरबा ड्रेस या त्योहारों के लिए खास डिजाइनर परिधान खरीद सकती हैं।
ग्रामीण हस्तकला विकास समिति के आयोजक जयेश कुमार ने कहा कि नेशनल सिल्क एक्सपो में विक्रेता सीधे ग्राहकों तक पहुंचकर अपने श्रम का सही मूल्य पा सकते हैं। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर आयोजकों ने इस बार 50 प्रतिशत तक की विशेष छूट देने की घोषणा की है। प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
गुजराती पैठानी पटोला के स्टाल पर त्रिनाथ कुंडू ने बताया कि उनके पास गुजराती पटोला साड़ी की रेंज 10 हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये की रेंज में है। कांजीवरम साड़ी की रेंज एक हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की रेंज में उपलब्ध है।
सागरिका स्टॉल पर स्वाति जैन ने बताया कि प्योर सिल्क सूट 2 हजार रुपये से लेकर 5 हजार रुपये की रेंज में उपलब्ध है। सिल्क साड़ी की रेंज पांच हजार से लेकर 30 हजार के रेंज में है। कश्मीर के स्टाल पर जावेद अली का कहना है कि साड़ियां रेंज 15 सौ रुपये से लेकर 50 हजार रुपये की रेंज में है। पश्मीना की साड़ी 45 हजार रुपये की है।
बिहार के भागलपुर के रहनेवाले सोनू कुमार केसरी का कहना है कि उनके स्टाल पर 1200 रुपये से लेकर 2500 रुपये के रेंज में सूट के कपड़े हैं। जबकि कुर्ता के कपड़े तीन सौ रुपये मीटर है।