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दीवारें रंग-रंग कर बेटे को बना दिया डॉक्टर

Fri, 26 Sep 2014 03:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जिंदगी में कोई भी काम छोटा नहीं होता। यदि किसी काम को मन और लगन से किया जाए तो उसमें सफलता मिलनी तय है। ऐसा ही कुछ ‘कूची’ नामक नाटक में देखने को मिला। इसका मंचन वीरवार को पंजाब कला भवन में किया गया। इस नाटक की कहानी ब्राह्मण पिता और पुत्र के इर्द-गिर्द घूमती है।
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ब्राह्मण पिता गुणी तो है, लेकिन वह अपने जीवन में पुत्र और परिवार के लिए कुछ कर नहीं पाता है। बेटा दीवारों को रंगने (कूची फेरने) का काम करता है। जो उसके पिता को मंजूर नहीं है। पिता उससे कहता है क्या तुम छोटे से काम में लगे हुए हो। बेटा अपने पिता की इस बात से सहमत नहीं होता है।

वह पिता से कहता है कि आप हमें उच्च शिक्षा नहीं दिला पाए और न ही बेहतर परवरिश कर पाए। यह छोटा काम ही मेरी रोजी रोटी का सहारा है। इस बात पर दोनों में विवाद होता है। लेकिन, अंत में यही कूची फेरने वाला अपने बेटे को पढ़ाकर डॉक्टर बनाने में कामयाब होता है। कूची का मंचन सजग नाटक संस्था शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) ने किया।
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इस नाटक का लेखन डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र और निर्देशन इरफान अहमद ने किया है। वहीं, दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल के दौरान वन एवं पर्यावरण निर्देशक संतोष कुमार ने डॉ. आनंद प्रकाश मिश्रा, डॉ. सरोजनी तन्हा, सत्येंद्र शुक्ला, इरफान अहमद को लेखक, निर्देशक, नाटक के क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया।
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