जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट में पड़े 25 हजार टन कचरे को हटाने का निर्णय अब मेयर राजबाला मलिक की कमेटी करेगी। मेयर की ओर से गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के निरीक्षण के लिए गठित कमेटी ने ही कचरा हटाने का प्रस्ताव दिया था। सदन की बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने कमेटी में क्षेत्रीय पार्षद शीला देवी को रखने का प्रस्ताव रखा। हालांकि निगम की ओर से लाया गया एजेंडा सदन ने पास कर दिया।
निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि निगम ने पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली, राजेश कुमार, महेश इंदर सिंह, एमओएच डॉ. एपी सिंह सहित 6 लोगों की कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान कमेटी ने देखा कि प्लांट के अंदर पहले से कचरे का एक डंपिग ग्राउंड बना है। वहीं मशीनों से प्रतिदिन आने वाले कचरे को निस्तारित किया जाना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में इस कचरे के निस्तारण के बिना मशीन के कार्य करने की क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती है। इसलिए इस कचरे को हटाना जरूरी है। हालांकि निगम ने इस कचरे को अपने वाहनों से हटाकर डंपिग ग्राउंड तक पहुंचाने की योजना बनाई है। जो कंपनी फिलहाल डंपिग ग्राउंड के कचरे का निस्तारण कर रही है, वही कंपनी इस कचरे का भी निस्तारण करेगी।
कंपनी फिलहाल 1 टन कचरा प्रोसेस करने का 630 रुपये चार्ज स्मार्ट सिटी से ले रही है। निगम को 25 हजार टन कचरा प्रोसेस करने के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। अब कचरे को उठाने का निर्णय भी मेयर की कमेटी ही करेगी। वहीं खाद व आरडीएफ बेचने के प्रस्ताव पर भी सहमति दे दी गई। अब निगम खाद का 50 किग्रा के बैग का 210 रुपए व आरडीएफ का 900 रुपए प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से बेचेगी। इसमें जीएसटी अलग है।
एक अगस्त से निगम के कर्मचारियों को फिर से स्मार्ट घड़ी दी जाएंगी। निगम ने कोरोना के कारण फरवरी के बाद कर्मचारियों को स्मार्ट घड़ी देना बंद कर दिया था। हालांकि कर्मचारी लगातार इसका विरोध करते रहे हैं लेकिन कमिश्नर केके यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को घड़ी दी जाएगी।
सदन की बैठक में निगम ने स्मार्ट घड़ियों के टेंडर व कर्मचारियों को वितरित करने संबंधी एजेंडा पेश किया। कमिश्नर ने बताया कि फरवरी में कुछ कर्मचारियों को स्मार्ट घड़ी वितरित कर दी गईं थीं। उसके बाद कोरोना महामारी के कारण इस कार्य को रोकना पड़ा था। चूंकि अब व्यवस्थाएं पटरी पर आ रहीं हैं इसलिए अब एक अगस्त से फिर से कर्मचारियों को घड़ियां दी जाएंगी।
कमिश्नर ने बताया कि निगम ने इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दिया है। निगम ने चार हजार घड़ियां मंगाई हैं। एक घड़ी का एक माह का किराया 471 रुपये है। इस हिसाब से निगम को एक माह का 18.64 लाख रुपये मासिक किराया देना होगा। कंपनी से तीन साल के लिए अनुबंध किया है। परिणाम बेहतर दिखे तो दो साल के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि एक घड़ी की कीमत लगभग 10 हजार से ज्यादा है।
बैठक में मलोया स्थित गोशाला में प्रति गाय 30 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव लाया गया था। सदन ने कहा कि अन्य गोशला की तरह इसे भी किसी एनजीओ को दे दिया जाए। उसके बाद प्रस्ताव पर मुहर लग गई। वहीं फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को उनकी यूनिफार्म का रुपया देने के लिए भी सदन ने सहमति दे दी। वहीं सदन ने एमओएच में 1254 कर्मचारियों की भर्ती को भी मंजूरी दे दी। कमिश्नर ने बताया कि सभी कर्मचारी जैम पोर्टल के माध्यम से भर्ती कराए गए हैं। इन्हें दो कंपनियों के अधीन काम करना होगा।
दुकान के बाहर अब दोपहर और रात दोनों समय लगा सकेंगे टेबल-कुर्सी
दुकानदार अब दोपहर और रात के समय दुकान के बाहर टेबल-कुर्सी लगा सकेंगे। पार्षदों ने निगम के इस एजेंडे पर मुहर लगा दी है। हालांकि पार्षदों ने कहा कि कोई दुकानदार एक समय टेबल कुर्सी लगाने की अनुमति मांगे तो उसे भी देनी होगी। साथ ही कमेटी यह जरूर तय करेगी कि कितनी कुर्सी व टेबल दुकान के बाहर लगानी है। अभी तक दुकानदार केवल शाम के समय ही टेबल कुर्सी लगा सकते थे। कमिश्नर केके यादव ने बताया कि पार्षद महेश इंदर सिंह ने पॉलिसी बनाकर नए रेट तय किए हैं। इसमें कॉर्नर की दुकानों के रेट ज्यादा रखे गए हैं।
- दुकानों के लिए रहेंगे यह रेट (किराया प्रति माह में)
- डे मार्केट के सामने का किराया 3000 रुपये प्रति माह
- बूथ मार्केट के सामने का किराया 4500 रुपये
- बे शॉप के सामने का किराया 7500 रुपये
- एससीओ या एससीएफ के सामने का किराया 10500 रुपये
- कॉर्नर की दुकानों का किराया (किराया प्रति माह में)
- डे मार्केट के सामने का किराया 3000 रुपये प्रति माह
- बूथ मार्केट के सामने का किराया 6000
- बे शॉप के सामने का किराया 10,000
- एससीओ या एससीएफ के सामने का किराया 14000 रुपये