चंडीगढ़ नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति के पांच सदस्यों का चुनाव निर्विरोध होना तय हो गया है, सतीश कैंथ आए ही नहीं। नगर निगम के सचिव कार्यालय में सबसे पहले वीरवार दोपहर बाद तीन बजे कांग्रेस पार्षद शीला देवी ने नामांकन किया। इसके बाद करीब साढ़े चार बजे भाजपा से रविकांत शर्मा, शक्ति प्रकाश देवशाली, महेश इंद्र सिंह सिद्धू और भरत कुमार ने वित्त एवं अनुबंध समिति का सदस्य बनने के लिए नामांकन किया। भाजपा ने ऐन वक्त पर ही इन नामों का खुलासा किया और मेयर हाउस से ये पार्षद सीधे नगर निगम कार्यालय में पहुंचे।
भाजपा के सदस्यों को पार्टी से निष्कासित पार्षद सतीश कैंथ के नामांकन भरने का भी डर सताता रहा। मेयर चुनाव के बाद निगम में सबसे अहम माने जाने वाली वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव अब निर्विरोध रूप से होने का रास्ता साफ हो गया है। बागी पार्षद सतीश कैंथ बतौर आजाद उम्मीदवार नामांकन भरने के लिए नहीं पहुंचे, जबकि उन्होंने पहले से ऐलान कर रखा था। कैंथ के चुनाव लड़ने की स्थिति में भाजपा को मेयर चुनाव की तर्ज पर कमेटी के चुनाव में भी क्रास वोटिंग का डर सता रहा था। निगम सदन की 30 जनवरी को होने वाली बैठक के दिन ही वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव तय किए गए हैं।
...इसलिए कांग्रेस के लिए छोड़नी पड़ी एक सीट
एक रणनीति के तहत कैंथ और क्रॉस वोटिंग को रोका जा सके, इसलिए सत्ता पक्ष पार्टी को पांच सदस्यों पर आधारित वित्त एवं अनुबंध समिति में कांग्रेस के लिए एक सीट छोड़नी पड़ी।
अंत समय तक लेते रहे खबर
पार्षद सतीश कैंथ के नामांकन प्रक्रिया में हिस्सा लेने को लेकर भाजपा में इस कदर तनाव था कि शाम पांच बजे के आसपास पार्टी के पार्षद नगर निगम सचिव सौरभ मिश्रा के कार्यालय के आसपास घूमते नजर आए। सबसे पहले पार्षद विनोद अग्रवाल आए। उनके जाने के बाद पार्टी के ही तीन अन्य सदस्यों में से दो उम्मीदवार पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली और रविकांत शर्मा के साथ-साथ गुरप्रीत सिंह ढिल्लों तो एडिशनल कमिश्नर और सचिव सौरभ मिश्रा के कार्यालय में उनके साथ बैठ गए।
सौरभ मिश्रा किसी बैठक में भाग लेने के लिए कुछ समय के लिए कार्यालय से बाहर गए हुए थे। वे शाम 4.50 बजे अपने ऑफिस में आकर बैठ गए ताकि कोई अन्य उम्मीदवार नामांकन भरने आता है तो वह मौजूद रह सकें। इसी बीच
जब कैंथ के नहीं आने की सूचना आई, तब कमरे में मौजूद पार्षदों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई।
हमें सूद, जसवाल और सुनीता को रोकना था : कैंथ
भाजपा से निष्कासित पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि यदि पार्षद अरुण सूद, आशा जसवाल या सुनीता धवन होतीं तो वे नामांकन करने जरूर आते। उन्हें जब पता चला कि इन तीनों में से किसी ने भी वित्त एवं अनुबंध समिति के लिए नामांकन नहीं भरा तो वे भी अपना नामांकन नहीं भरने आए। हमें इन्हें रोकना था, जिसमें हम सफल रहे।