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नागरिकता कानून: हरियाणा और चंडीगढ़ में सड़कों पर उतरे मुस्लिम, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

Thu, 19 Dec 2019 07:38 PM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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विरोध प्रदर्शन करते मुस्लिम - फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में मुस्लिम वर्ग के लोग गुरुवार को चंडीगढ़ और हरियाणा में सड़कों पर उतर आए। हजारों की संख्या में लोग चंडीगढ़ सेक्टर 20 स्थित जामा मस्जिद के पास इकट्ठा हुए। फिर उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान काफी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून धर्मनिरपेक्ष संरचना के लिए खुली चुनौती है।

 

भारतीय संविधान का उल्लंघन है। यह हमारे मौलिक अधिकारों का हनन करता है। इसलिए इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। हरियाणा में पानीपत और यमुनानगर में भी संगठनों ने एनआरसी के समर्थन में जुलूस निकाला। वही कुछ संगठन इसके विरोध में धरना प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आए।

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लुधियानाः नागरिकता कानून को रद्द करने की मांग 
जामा मस्जिद में हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई भाईचारे के सदस्यों की एक मीटिंग शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के प्रधान प्रीतपाल सिंह, समाज सेवी पूर्व पार्षद परमिंदर मेहता, किलवरी चर्च सीएनआई के पादरी राम लाल, चर्च के यूथ सेक्रेटरी संदीप प्रेम मसीह और आदि धर्म समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार अतिकाय उपस्थित थे। 

शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि देशभर में हो रहे प्रदर्शन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि केंद्र सरकार की संविधान के खिलाफ बनाई गई नीतियों के खिलाफ है। धर्म  को आधार बनाकर बनाया गया नागरिकता कानून देश को बांटने वाला है। शाही इमाम ने कहा कि 1947 में मोहम्मद अली जिन्ना की जिन नीतियों को भारत के हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई और अनुसूचित भाईचारे ने नकारा था, आज उसी लोकतंत्र में धर्म के आधार पर कानून थोपे जा रहे हैं। 

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इस अवसर पर प्रितपाल सिंह ने कहा कि नागरिकता कानून में सभी धर्मों के लोगों को रखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से हिंदू-सिख व अन्य धर्मों के शरणार्थियों को नागरिकता देकर अच्छा कदम उठाया गया है। इसके साथ ही मुस्लिम समाज को भी इस कानून में शामिल करना चाहिए था। 

आदि धर्म समाज से राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार अतिकाय ने कहा कि भारत में कभी नफरत की जीत नहीं हुई है। राजकुमार ने कहा कि आज देश में एक बार फिर सांप्रदायिक ताकतें लोगों को बांट कर वोट की राजनीति कर रही हैं। किलवरी चर्च सीएनआई के पादरी राम लाल व यूथ सेक्रेटरी संदीप प्रेम मसीह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून बांटने वाला है। उन्होंने कहा कि कट्टरवाद के लिए हमारे देश में कोई भी धर्म कभी सहमत नहीं होगा। हम सब एक हैं और यही विश्व में हमारी पहचान है। सभी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यह कानून रद्द किया जाए।

पटियाला में चक्का जाम
नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी के विरोध में गुरुवार को पटियाला में मुस्लिम, एससी, सिख एकता मंच की ओर से साझे तौर पर बस स्टैंड के पास प्रदर्शन किया गया। कुछ समय के लिए आंदोलनकारियों ने चक्का भी जाम किया। एसी नेता डा. जतिंदर सिंह मट्टू की अगुवाई में इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इससे पहले एक बड़े काफिले के रूप में फव्वारा चौक तक रोष मार्च किया गया। 

डा. मट्टू ने कहा कि केंद्र ने यह कानून बनाकर सीधे तौर पर संविधान और जम्हूरियत का गला घोंटा है। इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जहां दलितों के लिए घातक है वहीं अल्पसंख्यक भी इनके निशाने पर हैं। साथ ही कहा कि देश में ऐसा कानून लाकर केंद्र ने धार्मिक पक्षपात किया है जो किसी देशवासियों को मंजूर नहीं है। मौके पर डा. बीआर आंबेडकर कर्मचारी महासंघ पंजाब व अन्य जत्थेबंदियों से अरुण धालीवाल, सतविंदर सिंह, जगमोहन चौहान मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में इस कानून को वापस लेने की मांग की।

सीपीआईएम ने फूंका प्रधानमंत्री का पुतला
नंगल में वामपंथी संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को सीपीआईएम द्वारा केंद्र सरकार की ओर से पारित नागरिकता संशोधन कानून का विरोध किया गया। सीपीआईएम के प्रदेश सचिव का. रघुनाथ सिंह के नेतृत्व में पीएम का पुतला फूंका गया। साथ ही सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। 

पाक विस्थापितों ने जताया आभार
उधर, जालंधर में पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए सैकड़ों हिंदू-सिख परिवारों ने गुरुवार को जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर नागरिकता संशोधन कानून के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। साथ ही प्रदेश सरकार से मांग की कि राज्य में भी इस विधेयक को लागू किया जाए। अपनी दास्तां सुनाते हुए पीड़ित परिवारों के जहां आंखों में आंसू भर आए वहीं उनके दिलों में उम्मीद की रोशनी भी जलती दिखाई दी। नए कानून से उन्हें जल्द राहत मिलने वाली है।
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पेशावर से विस्थापित होकर आए गुलजारी लाल ने बताया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए वातावरण इतना असुरक्षित है कि वे अपने बच्चों को निर्भय होकर स्कूल भी नहीं भेज पाते। आपराधिक तत्व उनकी बच्चियों को उठाकर ले जाते हैं और बाद में बता दिया जाता है कि वह मुसलमान हो गई। इसके बाद न तो पाकिस्तान का कोई कानून और न ही पुलिस व्यवस्था उन्हें इंसाफ दिला पातीं। इन बच्चियों के सामने गुंडों के साथ जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

16 साल की हिना ने बताया कि स्कूल-कॉलेजों में जाते समय उन्हें भय के माहौल में रहना पड़ता है। उन्हें कलमा पढ़ने को मजबूर किया जाता है। इसी तरह कस्तूरी लाल व 11वीं के विद्यार्थी सागर नागपाल ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदुओं को अपने प्रियजनों के शवों का अंतिम संस्कार करवाने के लिए सैकड़ों किमी दूर जाना पड़ता है। 

दुनिया के प्रताड़ित हिंदू अगर भारत नहीं आएंगे तो आखिर कहां जाएंगे। 36 साल की महिला रेशमा देवी बताती हैं कि मोदी सरकार ने जैसे ही नागरिकता संशोधन विधेयक पास किया उन्होंने राहत की सांस ली और अब उनमें उम्मीद जगी है कि उनके बच्चे भी अच्छा जीवन व्यतीत कर सकेंगे। विस्थापितों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि वह इस कानून के मार्ग में रोड़ा न अटकाए और पंजाब में भी इसे लागू करे। मौके पर विस्थापित हिंदू-सिखों ने लड्डू बांटकर एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाया और प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृहमंत्री का आभार जताया।
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