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स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री, अनदेखी का शिकार, पर उम्मीद कायम

Sun, 17 Jan 2016 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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देश ही नहीं, विदेशों में भी पहचान बनाने वाली कुंडली की स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री आज सरकार की अनदेखी का शिकार है, लेकिन उम्मीद कायम है। चाइना व कोरिया से विदेशों में मुकाबला करने के लिए प्रदेश सरकार फ्रेट सब्सिडी देती थी, जिसे हुड्डा सरकार ने बंद कर दिया।
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अब इंडस्ट्री से जुड़े उद्योगपतियों को खट्टर सरकार से उम्मीद है। वे चाहते हैं कि उन्हें रिवार्ड, अवार्ड, रिकोग्नाइजेशन व प्राइड मिले। जिले में चार औद्योगिक एरिया हैं। सोनीपत, कुंडली, राई व बड़ी एचएसआईडीसी। दिल्ली से सटा होने के चलते कुंडली एचएसआईडीसी की प्रदेश के उद्योग जगत में विशेष पहचान है।

खासकर स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री की, जिससे जुड़े उद्योगपतियों के दम पर इंडस्ट्री में बनने वाले स्टील के बर्तनों की चमक देश से ज्यादा विदेशों में है, लेकिन यह इंडस्ट्री आज नौकरीशाही से परेशान है। 2013 से बंद फ्रेट सब्सिडी फिर से दी जाए, जिससे उद्योगपति अपना माल समुद्र किनारे तक पहुंचा सके, और वहां से शिप के माध्यम से विदेशों तक माल  पहुंचाया जाए। क्योंकि विदेशों में भारतीय कंपनियों को चीन व दक्षिण कोरिया की कंपनियों से मुकाबला करना पड़ता है।
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विदेश में माल निर्यात समुद्र मार्ग से किया जाता है, लेकिन कुंडली से बंदरगाहों की दूरी बहुत ज्यादा है। उद्योगपतियों का कहना है कि सेल्स टैक्स व वैट को लेकर लंबी प्रक्रिया चलती है। अधिकारी बेवजह आकर परेशान करते हैं। फाल्ट बताकर जुर्माना लगा देते हैं। अधिकारियों के फैसले को चुनाती दी जाती है तो फैसला आने में लंबा समय लग जाता है। इंडस्ट्री व सरकार के बीच की कागजी प्रक्रिया को सरल किया जाए, ताकि समय भी कम लगे।

स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री की कुंडली में बड़ी-बड़ी उद्योगिक इकाइयां तो हैं, लेकिन सहायक इकाइंया नहीं हैं। डाई, कलर व दूसरे छोटे-छोटे काम के लिए माल दिल्ली के कीर्तिनगर व दूसरे इलाकों में भेजा पड़ता है। आने-जाने में केवल जगह-जगह सेल्स टैक्स वाले परेशान करते हैं, बल्कि ट्रांसपोर्ट की भी दिक्कत आती है। ऐसे में कुंडली एचएसआईडीसी में ही छोटी-छोटी सहायक इकाइयां बनाई जाए। इसके लिए एचएसआईडीसी में जमीन भी काफी खाली पड़ी है।

इंडस्ट्री में कुशल श्रमिकों की बेहद कमी है। ज्यादातर श्रमिक बंगाल, बिहार व यूपी से आते हैं, जिन्हें यहीं पर क्वार्टर लेकर रहना पड़ता है, लेकिन एचएसआईडीसी में बनाए गए क्वार्टर बेहद महंगे हैं। श्रमिक उन्हें खरीदने की सोच भी नहीं सकता। ऐसे में सस्ती दर पर श्रमिकों को क्वार्टर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि इंडस्ट्री को आसानी से कुशल कारीगर मिल सकें। स्टेनलेस स्टील की कुंडली में 100 के करीब बड़ी व छोटी इकाइंया हैं। स्टेनलेस स्टील उद्योग के कारोबार प्रमोद गुप्ता को सरकार ने हाल ही में पुरस्कार देकर सम्मानित किया था।

इंडस्ट्री का करीब 2 हजार करोड़ सालाना टर्नओवर है। साथ ही कंपनियों में करीब एक लाख के करीब परिवार जुड़े हुए हैं। इसी इंडस्ट्री से उनकी रोजी-रोटी चलती है। कुंडली स्टेनलेस स्टील हाउस एसोसिएशन के प्रधान नरेश कल्सन सफल कारोबारी हैं। उन्हें 2005-06 में केंद्र सरकार ने स्मॉल इंटरप्राइजिस के क्षेत्र में डोमेस्टिक मेटल प्रोडक्ट के लिए द स्टार परफार्मर का पुरस्कार दिया था। कल्सन का कहना है कि स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री को प्रदेश सरकार से बेहद उम्मीद है। सरकार उनकी समस्याओं की गहराई में जाकर समाधान करेगी।
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