जम्मू-कश्मीर के राजोरी स्थित नौशेरा में एलओसी पर शहीद हुए गांव गोइंदवाल साहिब के नायब सूबेदार राजविंदर सिंह के अंतिम संस्कार पर सोमवार को प्रशासन और परिजनों में विवाद हो गया। शहीद के परिजन उनका अंतिम संस्कार श्मशान घाट के बजाय अलग जगह पर करना चाहते थे। आखिरकार एक घंटे बाद प्रशासन के मानने पर सिविल अस्पताल के पास शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम करीब सवा छह बजे शहीद राजविंदर सिंह का शव गांव पहुंचा तो परिवार ने मांग की कि अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन द्वारा अलग से जगह दी जाए। वह गांव के श्मशान घाट में शहीद का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते थे लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से पहुंचे डीसी कुलवंत सिंह ने उन्हें कहा कि शहीद का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में ही किया जाएगा और उनके नाम पर अलग से स्मारक बनाने के लिए जिला प्रशासन बाद में स्थान देगा।
डीसी की बात सुनने के बाद शहीद के परिजन भड़क गए। शहीद के पारिवारिक सदस्यों का कहना था कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले राजविंदर सिंह के अंतिम संस्कार के लिए क्या सरकार और जिला प्रशासन स्थान तक नहीं दे सकती। खड़ूर साहिब के सांसद जसबीर सिंह डिंपा ने भी शहीद के परिजनों और ग्रामीणों को शहीद का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में करने के लिए समझाया लेकिन वे नहीं माने।
करीब एक घंटे बाद समय की नजाकत और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने गोइंदवाल साहिब के सिविल अस्पताल के पास अंतिम संस्कार के लिए जगह उपलब्ध करवाई। इसके बाद रात करीब पौने आठ बजे शहीद राजविंदर सिंह का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
सीएम ने की 50 लाख और सरकारी नौकरी की घोषणा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें शहीद राजविंदर सिंह के परिवार से पूरी हमदर्दी है। सरकार शहीद के परिवार को 50 लाख रुपये देगी। इसके अलावा उनके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। वहीं, खड़ूर साहिब के सांसद जसबीर सिंह डिंपा ने कहा कि गांव में स्कूल का नाम बदलकर शहीद के नाम पर रखा जाएगा।
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