बीते एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे किसानों ने आखिरकार तीन कृषि कानून रद्द करवा लिए लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार के प्रति किसानों और उनके परिवारों के मन में तल्खी अभी कम नहीं हुई है। जहां तक जातीय समीकरण का सवाल है, पंजाब में जाट सिखों की आबादी 30 प्रतिशत है, जबकि राज्य की 32 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है, जो भारत में किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इनमें रविदासिया और वाल्मीकि समुदाय के मतदाता 24-10 फीसदी हैं। यही कारण है कि सभी सियासी दलों की नजरें इन्हीं जातीय वोटों पर रहती हैं, जो कई बार एकमुश्त वोट के रूप में प्रदेश में चुनाव की हवा बदलते रहे हैं।
पंजाब की 34 सीटें आरक्षित
पंजाब में 34 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 21 सीटें जीती थीं। आम आदमी पार्टी के हिस्से में 9, अकाली दल के 3 और भाजपा के हिस्से में एक सीट आई थी। ये सीटें हैं- पठानकोट की भोआ, गुरदासपुर की दीनानगर, गुरदासपुर की श्री हरगोबिंदपुर, अमृतसर की जंडियाला गुरु, अमृतसर वेस्ट, अटारी, बाबा बकाला, कपूरथला की फगवाड़ा, जालंधर की फिल्लौर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट, आदमपुर, होशियारपुर की शाम चौरासी और चब्बेवाल, नवांशहर की बंगा, रोपड़ की चमकौर साहिब, फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाना, लुधियाना की गिल, पायल, जगरांव, रायकोट, मोगा की निहाल सिंह वाला, फिरोजपुर की फिरोजपुर सीट, फाजिल्का की बल्लुआना, श्री मुक्तसर साहिब की मलोट, बठिंडा की भुच्चो मंडी और बठिंडा ग्रामीण, मानसा की बुडलाडा, संगरूर की दिड़बा, बरनाला की भदौड़ और महल कलां, पटियाला की नाभा व शुतराना।