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मिलावट से सावधान: चंडीगढ़ में पनीर के 70 फीसदी से ज्यादा नमूने फेल, फलों में मात्रा से अधिक मिला सीसा

Thu, 05 Oct 2023 01:21 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सेक्टर-26 की मंडी से लिए गए नमूनों में से शिमला मिर्च, करेला, मटर और मौसमी में मात्रा से अधिक लेड पाया गया है। जुलाई में हुई जांच में भी इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। फल और सब्जियों की पैदावार चंडीगढ़ में नहीं होती। इस तरह उसमें मिलावट पर रोक अपने स्तर पर करना संभव नहीं है।
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Paneer - फोटो : Istock
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विस्तार
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चंडीगढ़ में खाद्य सामग्री में मिलावट का खेल चल रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से एक महीने में शहर के अलग-अलग बाजारों से लिए गए पनीर के 70 प्रतिशत से ज्यादा नमूने फेल हो गए हैं, जबकि दूध के 30 प्रतिशत नमूनों में गड़बड़ी पाई गई है। दूसरी ओर, शिमला मिर्च, करेला, हरा मटर और मौसमी में मात्रा से अधिक लेड (सीसा) की पुष्टि हुई है।
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दूध व पनीर की जांच खाद्य सुरक्षा विभाग अपने लैब में कर रहा है, जबकि फल और सब्जी के नमूनों की जांच इंटरस्टेलर टेस्टिंग सेंटर (आईटीसी) प्राइवेट लिमिटेड प्रयोगशाला पंचकूला और पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर कृषि एवं खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला मोहाली में करवाई जा रही है।
 

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सब्जी में मात्रा से अधिक लेड
जांच के दौरान सेक्टर-26 की मंडी से लिए गए नमूनों में से शिमला मिर्च, करेला, मटर और मौसमी में मात्रा से अधिक लेड पाया गया है। जुलाई में हुई जांच में भी इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। मंडी में हिमाचल से शिमला मिर्च, उत्तर प्रदेश सहित पंजाब व हिमाचल से करेला, लाहौर स्पीति, श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर से मटर और दिल्ली से मौसमी की आवक हो रही है। 

खाद्य सुरक्षा विभाग के हस्ताक्षरी अधिकारी सुखविंदर सिंह का कहना है कि फल और सब्जियों की पैदावार चंडीगढ़ में नहीं होती। इस तरह उसमें मिलावट पर रोक अपने स्तर पर करना संभव नहीं है, इसलिए जांच के जरिए वास्तविकता की पड़ताल कर संबंधित प्रदेशों को उसकी रिपोर्ट भेजी जा रही है, ताकि वह अपने यहां से भेजे जाने वाले फल और सब्जियों में लेड की मात्रा की अधिकता के कारण की जांच कर उसे दूर करने का प्रयास सुनिश्चित करें।

हर महीने 152 नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग के इंस्पेक्टर महीने में लगभग 152 नमूनों का संग्रह कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों में 450 नमूने लिए जा चुके हैं। इसमें दूध, दही, पनीर, तेल, घी, बटर, चीज, फल, सब्जी, मिठाई, एनर्जी ड्रिंक, नमक, डिब्बा बंद पानी शामिल है।

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अब मौसम के अनुसार जांच की नीति
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सामग्रियों के साथ फल-सब्जी की जांच के लिए अलग-अलग महीने तय किए हैं। इसमें अप्रैल से जून तक डेयरी उत्पाद, जुलाई से सितंबर तक तेल और फैट उत्पाद, अक्तूबर से दिसंबर तक मिठाइयां, जनवरी से मार्च तक दाल और आटे से बने उत्पाद की जांच होनी है। इस निर्देश के साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच सामग्री संबंधी निर्णय संबंधित अधिकारी उस क्षेत्र की मौजूदा स्थिति के आधार पर भी ले सकता है।

पनीर में मिलावट की ऐसे करें पहचान
पनीर के टुकड़े को मैश करके उसमें टिंचर आयोडीन एक चुटकी डालें। अगर पनीर का रंग बदलने लगे तो समझिए पनीर में मिलावट है।

दूध की महज 37 सेकेंड में जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में कोई भी व्यक्ति कच्चे दूध की जांच करवाकर महज 37 सेकेंड में उसकी रिपोर्ट प्राप्त कर सकता है।

महज 20 रुपये में कराएं जांच
मोबाइल टेस्टिंग टीम वैन के साथ हर केंद्र पर जाकर वहां आए मरीजों व उनके परिजनों को खाद्य पदार्थों में मिलावट, मिलेट्स के फायदे बताने के साथ ही खाद्य पदार्थों की लाइव टेस्टिंग करके दिखाती है। इसके साथ ही लोग महज 20 रुपये में 14 प्रकार के खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करवा सकते हैं।

यहां करें खाद्य संबंधी शिकायत
102 और 0172-2752128 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा Email-foodcomplaintchandigarh@gmail.com Chandigarh grievance portal: sampark.chd.nic.in/rajbhawan/ पर शिकायत की जा सकती है।

पांच दिन यहां रहती है वैन
केंद्र                                          दिन

सिविल अस्पताल सेक्टर 22           सोमवार
सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर 8            मंगलवार
सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर 40           बुधवार
सिविल अस्पताल सेक्टर 45          वीरवार
सिविल अस्पताल मनीमाजरा         शुक्रवार

इस तरह दिखते हैं लक्षण
  • लेड/सीसा विषाक्तता प्रायः शरीर में लेड/सीसे के अवशोषण के कारण होती है और इसके कारण विशेष रूप से थकान, पेट में दर्द, दस्त, भूख न लगना, एनीमिया, मांसपेशियों के पक्षाघात या अंगों की कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  • 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे विशेष रूप से लेड/सीसा विषाक्तता की चपेट में आते हैं, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक लेड विषाक्तता मानव स्वास्थ्य के लिये घातक हो सकती है।
  • लेड के संपर्क में आने से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की दुर्बलता, इम्यूनोटॉक्सिसिटी और प्रजनन अंगों में विषाक्तता भी होती है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार अभियान चला रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने खान-पान के प्रति सजग रहें। किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका पर विभाग के हेल्पलाइन नंबर या ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। -अजय चगती, स्वास्थ्य सचिव
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