अब मौसम के अनुसार जांच की नीति
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सामग्रियों के साथ फल-सब्जी की जांच के लिए अलग-अलग महीने तय किए हैं। इसमें अप्रैल से जून तक डेयरी उत्पाद, जुलाई से सितंबर तक तेल और फैट उत्पाद, अक्तूबर से दिसंबर तक मिठाइयां, जनवरी से मार्च तक दाल और आटे से बने उत्पाद की जांच होनी है। इस निर्देश के साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच सामग्री संबंधी निर्णय संबंधित अधिकारी उस क्षेत्र की मौजूदा स्थिति के आधार पर भी ले सकता है।
पनीर में मिलावट की ऐसे करें पहचान
पनीर के टुकड़े को मैश करके उसमें टिंचर आयोडीन एक चुटकी डालें। अगर पनीर का रंग बदलने लगे तो समझिए पनीर में मिलावट है।
दूध की महज 37 सेकेंड में जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में कोई भी व्यक्ति कच्चे दूध की जांच करवाकर महज 37 सेकेंड में उसकी रिपोर्ट प्राप्त कर सकता है।
महज 20 रुपये में कराएं जांच
मोबाइल टेस्टिंग टीम वैन के साथ हर केंद्र पर जाकर वहां आए मरीजों व उनके परिजनों को खाद्य पदार्थों में मिलावट, मिलेट्स के फायदे बताने के साथ ही खाद्य पदार्थों की लाइव टेस्टिंग करके दिखाती है। इसके साथ ही लोग महज 20 रुपये में 14 प्रकार के खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करवा सकते हैं।
यहां करें खाद्य संबंधी शिकायत
102 और 0172-2752128 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा Email-foodcomplaintchandigarh@gmail.com Chandigarh grievance portal: sampark.chd.nic.in/rajbhawan/ पर शिकायत की जा सकती है।
पांच दिन यहां रहती है वैन
केंद्र दिन
सिविल अस्पताल सेक्टर 22 सोमवार
सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर 8 मंगलवार
सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर 40 बुधवार
सिविल अस्पताल सेक्टर 45 वीरवार
सिविल अस्पताल मनीमाजरा शुक्रवार
इस तरह दिखते हैं लक्षण
- लेड/सीसा विषाक्तता प्रायः शरीर में लेड/सीसे के अवशोषण के कारण होती है और इसके कारण विशेष रूप से थकान, पेट में दर्द, दस्त, भूख न लगना, एनीमिया, मांसपेशियों के पक्षाघात या अंगों की कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे विशेष रूप से लेड/सीसा विषाक्तता की चपेट में आते हैं, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक लेड विषाक्तता मानव स्वास्थ्य के लिये घातक हो सकती है।
- लेड के संपर्क में आने से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की दुर्बलता, इम्यूनोटॉक्सिसिटी और प्रजनन अंगों में विषाक्तता भी होती है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार अभियान चला रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने खान-पान के प्रति सजग रहें। किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका पर विभाग के हेल्पलाइन नंबर या ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
-अजय चगती, स्वास्थ्य सचिव