चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) में 70 से ज्यादा चालक-परिचालक बसों के स्टेयरिंग की जगह दफ्तरों में फाइलें थामे बाबूगिरी का काम कर रहे हैं। चालक-परिचालक की कमी से लंबी दूरी की कई बसें डिपो में खड़ी हैं। कई रूट पर बसें नहीं चल रहीं। इससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ये खुलासा एक आरटीआई में जवाब में हुआ है।
ये आलम तब है, जब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान परिवहन विभाग के अधिकारियों ने एक एफिडेविट दिया है और कहा है कि वह सुनिश्चित करेंगे कि चालक व परिचालकों की ड्यूटी दफ्तर या अन्य ब्रांचों में नहीं लगाई जाएगी। उन्हें रूट पर ही लगाया जाएगा। हालांकि अब भी कई कर्मचारी विभिन्न ब्रांचों में ड्यूटी दे रहे हैं। इसकी वजह से सीटीयू लोकल व लंबी दूरी के रूटों पर आम जनता को बेहतर तरीके से सेवा नहीं दे पा रहा है।
शहर के दोनों बस अड्डों की जिम्मेदारी चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की है, लेकिन विभाग के अधिकारी और कुछ कर्मचारियों ने मिलकर दोनों बस अड्डों को दूसरे राज्यों की परिवहन सेवा के जिम्मे छोड़ रखा है, क्योंकि कई चालक व परिचालक अन्य ब्रांचों में काम कर रहे हैं। इससे लोगों को परेशानी तो झेलनी ही पड़ रही है, विभाग को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। कुछ चालक-परिचालक अपनी मनमर्जी और अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से सालों से ब्रांचों में बैठे हुए हैं।
कई रूटों पर बस चलाने का परमिट, लेकिन नहीं जा रही बसें
सीटीयू के पास कई राज्यों के विभिन्न रूटों पर बसें चलाने का परमिट है लेकिन बसें नहीं चलाईं जा रही हैं। इनमें चंडीगढ़ से हल्द्वानी रात्रि सेवा, चंडीगढ़ से टनकपुर रात्रि सेवा, आगरा, जयपुर, हिमाचल प्रदेश के कई रूट व अन्य राज्यों के भी कई अन्य रूट शामिल हैं। इससे जनता को परेशानी हो ही रही है, विभाग भी आर्थिक घाटा झेल रहा है। क्योंकि इन परमिटों के एवज में दूसरे राज्यों को बिना बस चलाए ही विभाग टैक्स देना पड़ रहा है। हैरानी की बात है कि नई बसें और पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी होने के बावजूद सभी शेड्यूल टाइम पर बसें नहीं चलाई जा रही हैं।
सीटीयू में ऐसा हो रहा है, मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। मैं जल्द इस संबंध में जानकारी लेकर जांच करवाऊंगा। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक