ढिलाई या चूक बर्दाश्त नहीं होगी
मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि गिरदावरी के दौरान सरकारी तंत्र में किसी भी स्तर पर किसी भी तरह की ढिलाई या चूक को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गिरदावरी से पहले, लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों द्वारा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों से लिए गए कर्ज की अदायगी पर भी रोक लगाने की घोषणा की है।
15 हजार मुआवजा नाकाफी: किसान यूनियन
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने पंजाब सरकार द्वारा गेहूं की फसल पर 15000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा घोषित करने को नाकाफी बताया है। यूनियन के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा है कि बारिश के कारण गेहूं की फसल ही नहीं तूड़ी के रूप में पशु चारे का भी नुकसान हुआ है। तूड़ी समेत कुल 80000 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हुआ है। राजेवाल ने कहा, 50 साल पहले प्राकृतिक आपदा फंड से मुआवजे का जो तरीका तय किया गया था, उसके तहत फसल के चार स्लैब होते थे। 25 फीसदी तक शून्य, 25-50 फीसदी, 50 से 75 फीसदी और 75-100 फीसदी।
मुख्यमंत्री मान ने उन स्लैब को तीन हिस्सों में बांट दिया। इस बार मुआवजा 33 फीसदी तक शून्य और उसके बाद 33-75 और 76-100 फीसदी के लिए मुआवजा दिया जाएगा। 50 साल पहले जो 5000 रुपये मुआवजा मिलता था, उसे अब 15000 करके सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि आज जमीन का ठेका ही 70 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है तो 15 हजार रुपये के मुआवजे से क्या भला होगा? इसके अलावा, गेहूं ही नहीं तूड़ी भी बर्बाद हो गई है।
उन्होंने कहा कि गिरदावरी का आदेश दिया गया है लेकिन सरकार के पास पटवारी ही नहीं हैं। राजेवाल ने आरोप लगाया कि पटवारी दफ्तरों में बैठकर 15-15 फीसदी नुकसान लिख रहे हैं, ताकि किसी को मुआवजा न देना पड़े। मोहाली के डीसी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है कि सरकार ने पांच एकड़ से अधिक किसी को मुआवजा न देने की अंदरखाते हिदायत जारी की है।