-चुनाव में अनियमितताओं को लेकर दाखिल की गई थी याचिकाएं
-270 से अधिक पंचायतों के चुनाव पर लगी रोक आदेश भी वापस
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वार्डबंदी, एक ही परिवार का वोट अलग अलग वार्ड में बनने व एनओसी के विषय पर दायर लगभग एक हजार से अधिक याचिकाओं को खारिज कर पंचायत चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही गत सप्ताह 270 पंचायतों के चुनाव पर लगाई गई रोक हटा दी है। हालांकि, कोर्ट ने कुछ याचिकाओं में चुनाव की वीडियोग्राफी की मांग को स्वीकार कर लिया है।
विभिन्न आरोपों के साथ सोमवार को करीब 800 याचिकाएं हाईकोर्ट के सामने सुनवाई के लिए पहुंची थीं। इस बीच सरकार ने कोर्ट से उन सभी याचिका पर भी सुनवाई करने का आग्रह किया, जिन पंचायतों के चुनाव पर गत सप्ताह हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। पंजाब सरकार के आग्रह पर कोर्ट ने सभी याचिका पर एक साथ आठ अलग अलग विषय पर सुनवाई शुरू की, जिसमें वार्डबंदी, नामांकन खारिज करने, वीडियोग्राफी व अन्य पर विषय शामिल हैं। कोर्ट ने वीडियोग्राफी की मांग की याचिका को छोड़कर सभी याचिका खारिज कर दीं। कोर्ट ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य चुनाव आयोग एक स्वतंत्र आयोग है, वह सभी तरह के मुद्दों को निपटने में सक्षम है।
कोर्ट के हस्तक्षेप पर याचिकाकर्ता व सरकार आमने-सामने
याची पक्ष की तरफ से कोर्ट से आग्रह किया गया कि कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है, क्योंकि चुनाव में नियमों को ताक पर रखा गया है। सरकार की तरफ से कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया के बीच में हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, इसलिए सभी याचिका मेंटेनेबल नहीं है। याची पक्ष की तरफ से चंडीगढ़ मेयर के चुनाव का हवाला देकर कहा गया कि चुनाव के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए फैसला दिया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट का विस्तृत ऑर्डर आना बाकी है। उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कोर्ट ने किस आधार पर याचिकाओं को खारिज किया। अवकाशकालीन बेंच ने माना था कि पंजाब में पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को नाम वापसी और मतदान की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित करना असांविधानिक है। इसके साथ ही 270 पंचायतों के चुनाव पर रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट ने इन पंचायतों के चुनाव पर लगी रोक भी हटा दी है।