आपदा प्रबंधन अधिकारी सौरभ का कहना है कि आधा रोहतक जिला जोन-4 में आता है। जबकि कुछ जोन तीन में तो महम जोन दो में है। जोन-4 में भूकंप से नुकसान की अधिक संभावना होती है। आपदा से अधिक नुकसान गलत निर्माण कार्यों से होता है। हमें बड़े भूकंपों से बचने के लिए खुद को तैयार रखना होगा। भवन निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का उपयोग होना चाहिए। अधिक नुकसान की संभावना ऊंची इमारतों में होता है।
भूकंप का केंद्र पाए जाने से डरे ग्रामीण
शुक्रवार को आए भूकंप ने चुलियाणा के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। राजबीर सिंह व नवीन कुमार, संजय कुमार, सुनील का कहना है कि इससे पहले 2017 में भी ऐसा ही भूकंप का झटका महसूस किया गया था। ये दूसरा झटका है। इलाके में गिझी गांव में सूरजभान व भैसरू कलां में नीरज कौशिक के मकान की दीवार में दरार आने की खबर आई है। कस्बे में एक मकान की खिड़की का शीश चटक गया। आपदा विभाग अधिकारी सौरभ का कहना है कि चुलियाणा व आसपास के ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि गांव में दो या तीन मंजिला मकान है। गुरूग्राम जैसे शहरों में बनी ऊंची बिल्डिंगों को खतरा होता है।