भइया हम यहां दिहाड़ी मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के कारण काम खत्म हो गया। ठेकेदार ने भी घर जाने के लिए कह दिया। हमने भी घर जाने के लिए ट्रेन से पंजीकरण कराया था लेकिन ट्रेन कैंसिल हो गई। अब हम घर नहीं जा पा रहे हैं, भइया हमें घर पहुंचा दो। - दीपा, निवासी सीतापुर
हल्लोमाजरा में पहले लंगर की व्यवस्था थी, जहां खाने को कुछ न कुछ मिल जाता था। अब तो लंगर बंटना भी बंद हो गया है। इसके कारण अब खाना भी नहीं मिल पा रहा है। काम नहीं होने के कारण मजबूरी में घर जा रहे थे लेकिन अब ट्रेन कैंसिल हो गई है। हमारी मदद करो भइया। - राकेश, निवासी सीतापुर
मैं यहां राज मिस्त्री का कार्य करता था, लॉकडाउन के कारण शहर में सारे निर्माण कार्य बंद गए हैं। ठेकेदार ने भी कहा है कि लॉकडाउन अभी और बढ़ेगा, तुम सब घर चले जाओ। अब घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। दिन रात घर जाने के लिए ही प्रयास कर रहा हूं। - विशाल, निवासी सीतापुर