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वो इंटरव्यू जिसने बढ़ा दी पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी की मुश्किलें, जानें- क्या है 29 साल पुराना मामला

Thu, 24 Dec 2020 01:58 AM IST
ajay kumar अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी। - फोटो : फाइल फोटो
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29 साल पुराने अपहरण और हत्या मामले में इंसाफ के लिए पीड़ित परिवार ने लंबी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। लेकिन कभी हार नहीं मानी। सिटको में तैनात इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी पूर्व आईएएस दर्शन सिंह मुल्तानी के बेटे थे। 1991 में जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ में बतौर एसएसपी तैनात थे, तब उन पर आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद बलवंत सिंह को शक के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि बलवंत सिंह का तब से कोई अता पता नहीं है। 

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इस मामले में 2015 में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ था। बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने बताया कि साल 2015 के अंत में पंजाब पुलिस के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने एक नामी राष्ट्रीय मैगजीन को अपना साक्षात्कार दिया था। वह अधिकारी सैनी के साथ काम कर चुका है। इसमें उस अधिकारी ने खुलासा किया था कि उस समय सुमेध सिंह सैनी और अन्य पुलिस अधिकारियों ने किस तरह गैर कानूनी तरीके से लोगों को उठाकर यातनाएं दी थीं। इसमें उनके भाई का जिक्र भी किया गया था। पुलिस की ओर से दी गई यातना से उसके भाई की मौत हो गई थी। इस साक्षात्कार को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किया गया था। लेकिन सुमेध सैनी के प्रभाव के चलते मामले में कुछ नहीं हुआ था।


सैनी की रिटायरमेंट के बाद दोबारा शुरू किया संघर्ष
पलविंदर ने बताया कि सुमेध सैनी के सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार ने दोबारा संघर्ष जारी रखने का फैसला किया। उन सभी लोगों से फिर संपर्क साधा, जो उस समय उसके भाई के साथ रह चुके थे। इस दौरान कई चीजें सामने आईं। इसमें कई ऐसे तथ्य थे, जो हिलाकर रख देने वाले थे। इसके बाद उन्होंने इस दिशा में संघर्ष तेज किया। 
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ऐसे अगवा किया था बलवंत को
पलविंदर सिंह निवासी जालंधर ने बताया था कि उसके भाई को अगवा करने का मामला 1991 का है। वह सिटको में जूनियर इंजीनियर थे और मोहाली के फेज-7 में रहते थे। उनके पिता दर्शन सिंह मुल्तानी पंजाब के एक सीनियर आईएएस अधिकारी थे। उस दौरान चंडीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी सुमेध सिंह सैनी की टीम ने उसके भाई बलवंत को चार बजे घर से उठाया था।

इतना ही नहीं मोहाली और पंजाब में उनके कई जानकारों को उठाकर पूछताछ की थी और यातनाएं दी थीं। उस समय भाई की सुरक्षित रिहाई के लिए परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मेरे पिता ने सभी कानूनी सहारे लिए थे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब कहीं जाकर उन्हें इंसाफ की उम्मीद बंधी है। बता दें कि इस मामले में 29 साल बाद बुधवार को मोहाली की अदालत में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

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