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मोगा बस कांडः मोदी सरकार की मंत्री को हाईकोर्ट का नोटिस

Wed, 20 May 2015 08:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मोगा आर्बिट बस कांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डिप्टी सीएम सुखबीर बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर को नोटिस कर 27 मई तक जवाब मांगा है।
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मामले की सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस लीजा गिल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया है कि सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर ऑर्बिट के हिस्सेदार हैं और मुख्यमंत्री परिवार से जुड़े हैं। ऐसे में पारदर्शी जांच की उम्मीद नहीं है।

मोहाली के एडवोकेट जसजीत सिंह बैंस ने मुख्य मामले में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री परिवार की शह होने के कारण ऑर्बिट बसों के कर्मचारी गुंडागर्दी करते हैं। इससे दूसरी बस कंपनियों के हौसले भी बुलंद हैं, जिसकी मिसाल खन्ना में राजदीप बस में छेड़छाड़ से साबित होती है।
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क्यों नहीं रद्द हुआ ऑर्बिट का लाइसेंस

हाईकोर्ट की बेंच ने मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऑर्बिट का लाइसेंस क्यों रद्द नहीं किया गया। बेंच ने ऑर्बिट एविएशन कंपनी की पिछले पांच सालों की बैलेंस शीट तलब की है। ऑर्बिट कंपनी की ओर से एडवोकेट गिरीश अग्निहोत्री पेश हुए, लेकिन मालिक का नाम सामने नहीं आ सका।

अब हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी आरएस बैंस के सुझाव पर 10 से अधिक बसों वाली कंपनियों की जानकारी मांगी है। साथ ही स्टेज कैरिज परमिट यानी मिनी बसों केे बारे में विवरण देने को कहा है। उल्लेखनीय है कि एक्टिंग चीफ जस्टिस को लिखे एक पत्र पर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था और ऑर्बिट कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

लिबड़ा मोटर्स की 10 बसें होंगी कुर्क
चार साल पुराने एक्सीडेंट के एक मामले में मृतक की फैमिली को 53 लाख का मुआवजा नहीं देने पर जिला अदालत ने लिबड़ा मोटर्स सरहिंद की दस बसों की कुर्की के आदेश दिए है। यह फैसला अतिरिक्त सेशन जज दिलबाग सिंह जौहल की अदालत ने सुनाया। मृतक की पत्नी सरबजीत कौर ने अदालत में केस दायर किया था। मोहाली के सेक्टर-70 निवासी मृतक हरप्रीत सिंह (40) के परिवार वालों ने मुआवजे के लिए अदालत में केस दायर किया था।
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राजदीप बस का लाइसेंस रद्द, ऑर्बिट पर कार्रवाई नहीं

याचिका में कहा गया है कि चूंकि ऑर्बिट एविएशन मुख्यमंत्री परिवार से संबंधित है, लिहाजा जांच प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। यह आरोप भी लगाया कि जिस प्रकार दिल्ली कैब रेप मामले के बाद उबेर कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था, उस तर्ज पर सरकार ने ऑर्बिट मामले में कार्रवाई नहीं की।

राज्य में भी कार्रवाई में भेदभाव झलका, ऑर्बिट पर कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन राजदीप बस का लाइसेंस कैंसिल करने का आदेश जारी हो गया। उधर, एडवोकेट जनरल ने बेंच से मोगा छेड़छाड़ की जांच को संवेदनशील बताते हुए इसे सार्वजनिक नहीं करने का आग्रह किया। सीबीआई जांच की मांग पर बेंच ने नोटिस जारी कर दिया है।

क्या था मामला
मोगा- कोटकपूरा मार्ग स्थित गांव गिल के पास बीते 29 अप्रैल को आर्बिट बस में कुछ युवकों ने मां-बेटी से छेड़छाड़ की। दोनों ने विरोध किया और मदद की गुहार भी लगाई लेकिन कोई आगे नहीं आया। आखिरकार तंग होकर मां-बेटी ने चलती बस से छलांग लगा दी। इससे बेटी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि मां घायल हो गई थी।
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