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अब रेल ट्रैक पर होंगे मिसाइलों के परीक्षण

Tue, 13 May 2014 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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भारत के इसरो मिशन और रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी जुड़ गई है। चंडीगढ़ टीबीआरएल ने अपनी रामगढ़ की लैबोरेटरी में रेल सुपरसोनिक ट्रैक का निर्माण किया है। इसकी सहायता से अब मिसाइल अज्ञैर एयरक्राफ्ट के प्रहार, अघात और क्षमता का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
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इस तरह की उपलब्धि दुनिया के चार से पांच देशों के खाते में ही है। अब इनमें भारत भी शामिल हो गया है। सोमवार को इस ट्रैक का उद्घाटन डिफेंस आर एंड डी के सेक्रेटरी और डीआरडीओ के डीजी अविनाश चंदर ने किया। उन्होंने कहा कि अब भारत के पास भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेस्ट सुविधा उपलब्ध है।

इसका सबसे ज्यादा फायदा इसरो के मैन्ड मिशन को होगा। टीबीआरएल के डायरेक्टर डॉ. मंजीत सिंह ने इस सुविधा के बारे में बताया कि लैबोट्ररी में चार किलोमीटर लंबे पांच ट्रैक बनाए गए हैं।
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इसमें डिजाइन रॉकेट की मदद से हर मिसाइल या एयरक्राफ्ट को सुपरसोनिक स्पीड से धकेलकर उसकी क्षमता को टेस्ट किया जाएगा। इसके लिए पहले पुराना तरीका अपनाया जाता था। उसमें ट्रैक भी बेहद छोटा होता था और ऊपर से प्रहार कर उसकी क्षमता का आकलन किया जाता था। उससे सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी।

नई टेस्ट सुविधा से एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी। टेस्ट के दौरान कितनी स्पीड से प्रहार करने पर उसके पैराशूट खुलेंगे। डीजी अविनाश चंदर ने बताया कि टीबीआरएल रक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही है। यहां पर विकसित की गई टेक्नोलॉजी का देश की सुरक्षा में बेहुत महत्वपूर्ण रोल है।

इस मौके पर उन्होंने रामगढ़ में बैलास्टिक विद्यालय का भी उद्घाटन किया। यह विद्यालय डीआरडीओ एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से संचालित किया जाता है। इस मौके पर डॉ. एसएस सुंदरम, डॉ. सतीश कुमार, अजय सिंह, एम बालाकृष्णनन, वीएस सेठी सहित कई लोग मौजूद थे।
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