अभिनय के माहिरों ने मिर्जा साहिबा की प्रेम कहानी टैगोर थियेटर के मंच पर कुछ इस तरह जीवंत की, ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। जट्टी बण गई भरावां दी, भाइयां तों यार मरा दित्ता। पीलू की इस कविता का जिक्र उनके द्वारा लिखित किस्सा मिर्जा साहिबा में पढ़ने को मिलता है। पीलू की कुछ ऐसी ही कई और कविताएं मंगलवार को टैगोर थिएटर में श्रोताओं को बलवंत गार्गी द्वारा लिखित नाटक मिर्जा साहिबा में सुनने को मिली।
नाटक का आयोजन पंजाब यूनिवर्सिटी के इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट द्वारा बलवंत गार्गी सेंचुरी को मनाने के उद्देश्य से किया गया। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस म्यूजिकल प्ले की शुरुआत घर वंझल दे जम्मिया मिर्जा करड़े वार और घर खीवे दे साहिबा जम्मी मंगलवार कविता से होती है। जिसे म्यूजिक डायरेक्टर तेजी गिल्ल ने पारंपरिक धुनों से संजोकर पेश किया।
उसके बाद मसीत का सीन आता है जहां मिर्जा साहिबा के प्यार के बारे में पूरी दुनिया को पता चल जाता है जिसे पीलू ने इस खूबसूरत कविता में कुछ इस प्रकार पेश किया है- साहिबा पढ़दी पट्टिया मिर्जा पढ़े कुरान, विच मसीत दे लगियां जानण कुल जहान। नाटक के अंत में कलाकार यह संदेश देते नजर आते हैं कि शुरू से ही प्यार करने वालों को समाज के कढ़े नियमों की खातिर अपने अरमानों का गला घोंटना पड़ता है।
इन इंस्ट्रूमेंट का किया इस्तेमाल
नाटक में सारंगी, अलगोजे, ढोलक, तबला, हारमोनियम, तूंबी, चुटकी और ढट्ट जैसे इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल किया गया। जब मंच पर कलाकारों ने पीलू द्वारा साहिबा की खूबसूरती पर लिखी कविता नक हुसैनी पिपला बैह उस्ताद घढैन, साहिबा दियां दो अखियां उड़दे बाज फहैन पेश की तो पूरा हॉल दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। प्ले की खूबसूरती इसके म्यूजिक में थी।
इन कलाकारों ने लिया भाग
जीएस चन्नी द्वारा निर्देशित इस नाटक में प्रगति शर्मा, जसवीर कुमार, कामना लगारिया, अंजली सिंह, विनोद भारती, जसपाल सिंह, गगन कपूर, जसविंदर, रिंकू जैन, विकरम सिंह,सुखी, चंद्रशेखर प्रसाद, मुंदरी, करमजीत सिंह, आशी, सन्नी, गुरसेवक सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरिंदर सिंह, राजेश, जजबीर, जशनप्रीत, जसप्रीत, सतवीर कौर और चैनीस गिल ने भाग लिया।