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चंडीगढ़ में टीनेजर्स का एक खौफनाक चेहरा ये भी

Wed, 07 May 2014 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर में नाबालिग अपराधियों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। कई नाबालिगों के नाम रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध में सामने आया है।
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पुलिस के रिकार्ड पर यदि नजर डालें तो वर्ष 2013 के मुकाबले 2014 में ज्यादा नाबालिग गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने 18 साल से कम आयु के करीब 678 नाबालिग गिरफ्तार किए गए है।

जबकि पिछले पांच सालों में 453 नाबालिगों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें अधिकतर मामले चोरी, जुआ, जेब काटने और झपटमारी के हैं।

18 से संख्या बढ़कर हुई 28
साल 2013 में अप्रैल माह तक पुलिस की ओर से 18 नाबालिग अलग-अलग अपराध के मामलों में गिरफ्तार किए गए थे। जबकि, इस साल अप्रैल तक इनकी संख्या बढ़कर 28 हो गई। यह 28 नाबालिगों को 20 दर्ज मामलों में गिरफ्तार किया गया है। अप्रैल में पुलिस ने चार झपटमारी के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिनमें 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 12 आरोपी नाबालिग हैं। सेक्टर-31 थाने के एरिया में कई झपटमारी की वारदातें हुई हैं।
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पुलिस के लिए भी मुश्किल
पुलिस के लिए भी नाबालिग को गिरफ्तार करना मुश्किल होता है, क्योंकि पुलिस ऐसे नाबालिग को थाने में रात के लिए हिरासत में नहीं रख सकती है। साथ ही पुलिस ऐसे नाबालिग से पूछताछ के लिए रिमांड भी नहीं ले सकती है।

रेहड़ीवाले की हत्या
सेक्टर-25 में रेहड़ी लेकर जा रहे एक व्यक्ति की दो नाबालिगों ने हत्या कर दी। फरवरी माह से अभी तक दोनों नाबालिग बाल सुधार गृह में है।

धोखा देकर कार से सामान भी चोरी किया
पिछले साल शहर में नाबालिग द्वारा चालकों को धोखा देकर उनकी कार से चोरी की वारदातें भी की गई हैं, जिसका पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है। यह नाबालिग चालक को यह कहकर बाहर आने के लिए कहते हैं कि उनका टायर पंचर हो गया है या फिर पेट्रोल लीक हो रहा है, जब चालक बाहर आता है तो पीछे से कार में रखा सामान लेकर नाबालिग भाग जाते हैं। पिछले साल सेक्टर-26 मंडी और औद्योगिक क्षेत्र के अलावा कई ट्रैफिक लाइट पर वारदात हो चुकी है।

भीख मांगने के नाम पर निकाल लिया मोबाइल
सेक्टर-23 बूथ मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश शर्मा का कहना है कि उनके यहां पर कई नाबालिग ग्राहकों से भीख मांगने के लिए आते हैं। उसने बताया कि मार्च माह में उनके यहां पर कई ग्राहकों के जेब से मोबाइल चोरी हो चुके है। उनका कहना है कि एक नाबालिग को पकड़ा भी गया था और उससे मोबाइल बरामद किया गया था, लेकिन पुलिस और व्यापारियों को ऐसे नाबालिग को रोकने में काफी मुश्किल हो रही है। पुलिस की ओर से सरकारी मकानों में चोरी की वारदातो को पकड़ने वालों में एक युवक 18 साल का था।

अधिकतर गरीब और मध्यम वर्ग के
पुलिस की ओर से पिछले पांच सालों में जितने भी नाबालिग पकड़े गए हैं, उनमें अधिकतर का परिवार गरीब और मध्यम वर्ग के है। जिनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे बच्चों ने जल्दी पैसे कमाने के लालच में वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार कई बार पेशेवार अपराधी भी नाबालिगों से वारदात को करवाने के लिए उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं।

प्रशासन को बनाने चाहिए अलग से सेंटर
युवसत्ता के को-ऑडिनेटर प्रमोद शर्मा का कहना है कि कालोनियों के साथ-साथ शहर में रहने वाले नाबालिग भी अपराध में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर बच्चों को जागरूक करने के लिए कई शिविर लगाए गए हैं। उनका कहना है कि आज कल बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप से लेकर हर सुविधा चाहिए।
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परिवार की हालत ठीक नहीं होने के कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होती है तो कई बार वह बुरी संगत में पड़ जाते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसे बच्चों के लिए अलग से सेंटर बनाने चाहिए, जहां पर बच्चों को अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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