धर्मनगरी में सोमवती अमावस्या पर भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर एवं सन्निहित सरोवर में डुबकी लगाई। रविवार से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरु हो गया था।
इस मौके पर उक्त दोनों सरोवरों के आसपास स्थित आश्रम एवं धर्मशालाएं खचाखच भरे रहे। सोमवती अमावस्या पर धर्मशालाओं और मंदिरों में भंडारे लगाए गए।
इधर, कैथल की ओर से आने-जाने वाली ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतना अधिक रही कि बड़ी संख्या में लोग ट्रेन की छत पर बैठे नजर आए। यही हालात बसों में भी रहे। स्नान के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के कुरुक्षेत्र पहुंचने से कई स्थानों पर जाम के हालात बने रहे।
ब्रह्मसरोवर तथा सन्निहित सरोवर पर बैठे तीर्थ पुरोहितों से श्रद्धालुओं ने स्नान करके अपने पितरों के निमित्त पिंडदान करवाए। सोमवती अमावस की पूर्व संध्या पर मंदिरों को रोशनी से सजाया गया था।
लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के कुरुक्षेत्र पहुंचने के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर सेे कोई सुचारु प्रबंध नहीं किए गए।
अंबेडकर चौक, देवीलाल चौक, सन्निहित सरोवर के निकट भीड़ होने के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई। लेकिन वहां यातायात व्यवस्था संभालने के लिए कोई प्रबंध नहीं था। इसी प्रकार ब्रह्मसरोवर तथा सन्निहित सरोवर के आसपास यात्रियों के पीने के पानी की कोई व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई।
श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं तीर्थ पुरोहित पंडित पवन शर्मा पौनी के अनुसार सोमवती अमावस्या पर कुरुक्षेत्र के सन्निहित सरोवर में स्नान करके पिंडदान एवं पूजा अर्चना एवं दानपुण्य करने का विशेष महत्त्व है। उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी में हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल और दिल्ली एवं आसपास के दूसरे राज्यों के ही नहीं,बल्कि देश के दूसरे हिस्सों से लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं।
लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
सोमवती अमावस्या के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सरस्वती तीर्थ में स्नान किया और अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान करवाए।
वैसे तो हर रोज यात्री सरस्वती तीर्थ पर आते हैं, लेकिन सोमवती अमावस्या का अपना ही महत्व है। दंत कथाओं के अनुसार पांडवोें के समय में एक भी सोमवती अमावस नहीं आई।
सोमवती अमावस का पिंडदान करने का कई गुणा फल मिलता है। सोमवती अमावस्या पर हरियाणा, पंजाब, यूपी, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश के लोगों ने पावन सरस्वती सरोवर में स्नान करके मंदिर में माथा टेका व पितृ शांति के लिए धन, कपड़े व खाने-पीने का सामान दान पुण्य किया।
सरस्वती तट के किनारे स्थित वट वृक्ष पर लोगों ने जल चढ़ाकर परिवारिक शांति की कामना भी की और श्याम कार्तिक मंदिर में भी तेल चढ़ाने के लिए श्रद्वालुओं का तांता लगा रहा। मेन चौक से लेकर सरस्वती मंदिर तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रही, जिसके चलते काफी समय तक राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध रहा।
बाहर से आए श्रद्धालु रमेश चंद, प्रकाश, बोहती देवी, रंजीत कौर, रजवंत सिंह आदि ने बताया कि प्रशासन द्वारा सोमवती अमावस पर कोई प्रबंध नहीं था और सरोवर में पानी की स्थिति भी साफ नहीं थी। भिखारियों की संख्या भी अत्यधिक थी, जोकि यात्रियों को परेशान कर रहे थे।\
श्रीजयराम आश्रम के दर्शन किए
श्रीजयराम आश्रम में बनाई गए मां वैष्णो देवी के भव्य दरबार एवं गुफा के अलावा चार धाम के दर्शन करने हजारों लोग उमडे़। श्रीजयराम के जितेंद्र शर्मा ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर कुरुक्षेत्र पहुंचे करीब 12 हजार श्रद्धालुओं के टोकन चार धाम एवं मां वैष्णो देवी दरबार देखने के लिए जमा हुए।
पैनोरमा का समय बढ़ाया
कुरुक्षेत्र के विख्यात पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र ने समन्वयक डॉ. राज मेहरोत्रा के मुताबिक सोमवती अमावस्या के मद्देजर आज पैनोरमा की समयावधि बढ़ाई गई थी,ताकि अधिक से अधिक लोग इसका अवलोकन कर सके। उन्होंने बताया कि पिछले सोमवती अमावस्या पर 17 हजार लोगों ने पैनोरमा का अवलोकन किया।