सरपंच बोले- आपने गलत शब्द क्यों बोले, मंत्री का जवाब- कोई क्लिपिंग दिखाओ
बैठक की शुरुआत में सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह समैण ने मंत्री के सरंपचों की नीयत को लेकर दिए गए बयान की निंदा की। साथ ही मंत्री से सवाल किया कि उन्होंने ऐसे शब्दों का प्रयोग क्यों किया। जवाब में मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई शब्द नहीं बोला, अगर कहा है तो कोई क्लिपिंग दिखाओ। हालांकि, सरपंच भी पीछे नहीं हटे और उन्होंने कहा कि ऐसी एक नहीं कई क्लिपिंग दिखा देंगे।
मंत्री की पीसी के दौरान सरपंचों की नारेबाजी
मंत्री देवेंद्र बबली जब मीडिया के बातचीत कर रहे थे तो हरियाणा निवास के बाहर सरपंच मंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
ये हैं मांगें
- संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार पंचायतों को 29 अधिकार पूर्ण रूप से दिए जाएं
- राइट टू रिकॉल एक्ट रद्द किया जाए
- 50 लाख रुपये से ऊपर के कार्यों पर ही ई-टेंडरिंग लागू की जाए
- सरपंचों का मानदेय 30 हजार और पंचों का 5 हजार रुपये हो
- पूर्व सरपंचों को पेंशन सुविधा दी जाए
- सरपंचों का प्रदेश में टोल फ्री हो
- मनरेगा की मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन हो और ऑनलाइन हाजिरी बंद की जाए
- मनरेगा का भुगतान हर तीन माह बाद ब्लाक स्तर हो
- पंचायतों के लिए ऑपरेटर नियुक्त हों
- पंचायतों के प्रस्ताव में विधायकों का दखल बंद किया जाए
सरपंचों के लगातार फोन आ रहे थे, इसलिए उनको बुलाया था और फीडबैक लिया। सरपंचों की मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा, क्योंकि ई-टेंडरिंग का फैसला सरकार का है। अगर संभव हुआ तो कल मुख्यमंत्री के साथ सरपंच एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की बैठक कराई जाएगी। हमने सरपंचों ने अनुरोध किया है कि वह ई-टेंडरिंग प्रणाली को लागू करके काम करके देखें, अगर कोई दिक्कत हैं तो इस पर विचार कर लिया जाएगा। - देंवेंद्र बबली, विकास एवं पंचायत मंत्री।
बैठक में किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन पाई। मंत्री केवल ई-टेंडरिंग का गुणगान करने आए थे। मांगों को लेकर उन्होंने कहा कि उनके हाथ में कुछ नहीं है, मुख्यमंत्री के सामने मामला रखेंगे। सरपंचों का आंदोलन जारी रहेगा। मांगें पूरी होने तक सरपंच पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई ई-टेंडरिंग की नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतों के मान-सम्मान और अधिकार की है। -रणबीर सिंह समैण, प्रदेशाध्यक्ष, सरपंच एसोसिएशन।
पंचायत मंत्री के साथ 12 बिंदुओं पर बातचीत हुई। बड़ा मसला ई-टेंडरिंग का था। हम ई-टेंडरिंग व अन्य मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई चाह रहे हैं। सरकार को मंगलवार दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया है। अगर सरकार मांगें मान लेती है तो ठीक, अन्यथा एक मार्च को सीएम आवास का घेराव किया जाएगा। -चंद्रमोहन पोटलिया, प्रदेश प्रवक्ता, सरपंच एसोसिएशन।