कॉलेज निदेशक के लिए पीजी डिग्री के बाद 20 साल का टीचिंग व रिसर्च का अनुभव और पांच साल तक प्रोफेसर के तौर पर अनुभव होना जरूरी है। साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से तय पेपर पब्लिश होने चाहिए। इसी प्रकार, चिकित्सा अधीक्षक पद के लिए पांच साल तक 300 बेड के अस्पताल में बतौर एमएस का अनुभव या पांच साल तक क्लीनिकल विभाग में बतौर मुखिया का अनुभव हो। 10 साल तक प्रशासनिक अनुभव होना जरूरी है। निदेशक और चिकित्सा निदेशक के पद तीन साल के लिए होंगे।
चिकित्सा निदेशक के लिए प्री मेरिट क्राइटेरिया अपनाया जाएगा
पहली बार चिकित्सा अधीक्षक पद के चयन के लिए लिए प्री मेरिट क्राइटेरिया अपनाया जाएगा। इसमें अभ्यर्थी के एमबीबीएस करियर में हासिल अंक, प्रोस्ट ग्रेजुएट में प्राप्त अंकों के साथ साथ अनुभव के आधार पर मेरिट बनेगी। साथ ही रिचर्स करने वाले के लिए 18 अतिरिक्त अंक रखे गए हैं। इस प्रकार से 50 अंक करियर के आधार पर आधारित मेरिट के होंगे और केवल 50 अंक का साक्षात्कार होगा।