नया राइफल हेल्मेट एके-47 की गोली से करेगा बचाव
बॉर्डर पर सेना जवानों के सिर पर सामान्य हेल्मेट रखे होते है जिसमें कोई भी गोली निकलकर सीधे उनके सिर में लगती है और जवानों की जान चली जाती है। लेकिन जवानों के सिर पर गोली लगने से रक्षा करने के लिए एसीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट लेवल-3 तैयार किए गए है जो कि सेना जवानों के सिर की सुरक्षा तकनीक में एक बड़ी छलांग है। इसे नई पीढ़ी की तकनीक का उपयोग करके तैयार किया गया है, जो कि राइफल, गोला बारूद जैसे एके-47 की गोलियों से भी पूरे सिर को सुरक्षा प्रदान करता है।
इसके अलावा थर्मल मोस्किटो कैमरा भी तैयार किया गया है जो कि सेना के लिए काफी जरूरी है। यह टारगेट लोकेटर कैमरा है जिसमें दिन की साइट में थर्मल इमेज को सर्च किया जा सकता है। जबकि
लांग रेंज मल्टीफंक्शनल इंफ्रारेड कैमरा 20 किलोमीटर दूर तक बॉर्डर पर छोटी से छोटी गतिविधि को बहुत नजदीक से दिखा सकता है। क्योंकि बॉर्डर पर अकसर पहाड़ी क्षेत्रों में सेना जवान ऊंचाई तक देखने में पहले दूरबीन का प्रयोग करते थे लेकिन इस नए कैमरे से 20 किलोमीटर तक बिलकुल साफ दिखाई देता है। दुश्मन की छोटी से छोटी हरकत को भी इससे आसानी से देखा जा सकता है। इसके
अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज एवं सर्विलांस सिस्टम और एमडब्ल्यू-5000 साइटिंग सिस्टम भी दूर तक देखने में क्षमता रखता है।
वाई-फाई से चलेगी सेना की नई थर्मल गन
इसके साथ ही कानपुर की एमकेयू द्वारा सेना के लिए थर्मल गन भी तैयार की गई है जो कि जल्द सेना का हिस्सा होगा। यह थर्मल गन करीब दो किलोमीटर दूर तक मारक क्षमता रखती है। इस गन की खासियत यह है कि इसमें एक स्कैनिंग कैमरा लगा है जो कि 2 किलोमीटर दूरी के अंदर किसी भी जगह छिपे हुए दुश्मन को स्कैन करके उसे मार सकती है। इस गन को बिना किसी जवान को हाथ में दिए महज स्टैंड पर लगाकर वाई-फाई से प्रयोग कर सकते है। इसके अलावा एके-47 को भी अपग्रेड कर दिया गया है जिसमें अब चार घंटे की बैटरी लाइफ दी गई है और यह नेट्रो वीजन पर आधारित होगी।
दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम करेगी एंट्री ड्रोन गन
चेन्नई की एरो स्पेस में तैयार की गई चैलेंजर एंटी ड्रोन गन भी भारतीय सेना सहित नौसेना और एयरफोर्स में भी शामिल हाे गई है। इस गन के जरिए सेना दुश्मन देश के किसी भी बड़े से बड़े व छोटे से छोटे ड्रोन को आसमान में ही ढूंढगर उसे दो से तीन किलोमीटर के एरिया में जाम किया जा सकता है। सेना द्वारा बाॅर्डर एरिया में इस चैलेंजर गन का प्रयोग शुरू भी कर दिया गया है। क्योंकि लड़ाई वाले बॉर्डर एरिया में अकसर दुश्मन देशों द्वारा ड्रोन का प्रयोग किया जाता है ताकि वह दूसरे देश की लोकेशन इत्यादि पता कर सकें।
वायुसेना जवानों के लिए तैयार हुआ एविऐशन नाइट विजन गॉगल्स हेल्मेट
इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स जवानों के लिए भी आसमान में हेलीकॉप्टर में से जमीन पर देखने के लिए नाइट विज़न गॉगल्स तैयार की गई है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना में भी नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) को जोड़ा गया है जिसका प्रयोग भी शुरू हाे गया है। वायुसेना नेट्रो एनबी-3101 एनवीजी का उपयोग कम रोशनी की स्थिति में भी विस्तृत छवि बनाने के लिए प्रयोग करती है। इससे आसमान से नीचे जमीन पर गहराई का भी पता चलता है क्योंकि कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और लैंडिंग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। यह पूरी तरह वाटरप्रूफ हैं और एमआईएल-एसटीडी-810जी मानकों को पूरा करता है। एमकेयू ने लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) के लिए नाइट विजन गॉगल्स तैयार किए हैं।