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Chandigarh News: आप में मेयर की दौड़ः सेक्टर-39 में पार्षदों से अलग-अलग हुई बैठक, पूछा- किसे बनाएं उम्मीदवार

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चंडीगढ़। शहर में मेयर चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के सह-प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने रविवार को सेक्टर-39 में पार्षदों और पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान पूछा गया कि किसे उम्मीदवार बनाया जाए। पार्षदों से उनके पसंद के बारे में भी पूछा गया। पार्टी को कुछ पार्षदों की बगावत का डर सता रहा है, जिसके चलते उम्मीदवार चयन को लेकर गहन मंथन चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि स्थिति संभालने के लिए पार्षदों को कुछ दिन बाद बाहर ले जाया जा सकता है।
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शहर में 24 जनवरी को मेयर चुनाव होंगे। इसके लिए 20 जनवरी को नामांकन होगा। इस बार भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मिलकर मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी कर रहे हैं। पिछली बार गठबंधन में मेयर की सीट आम आदमी पार्टी के खाते में गई थी और सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। माना जा रहा है कि इस बार भी सीट शेयरिंग का यही फार्मूला होगा। हालांकि, अब तक इस पर आखिरी मुहर नहीं लग पाई है, लेकिन दोनों पार्टियों ने इसी फार्मूले को आधार बनाकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं और उम्मीदवार के चयन के लिए बैठकें की जा रही हैं। रविवार को सेक्टर-39 के आम आदमी पार्टी कार्यालय में पार्टी के सह-प्रभारी डॉ. एसएस आहलूवालिया, प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल व पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने एक-एक पार्षद के साथ अलग-अलग बैठक की और उनसे उम्मीदवार के बारे में चर्चा की। यह भी पूछा गया कि किसे उम्मीदवार बनाया जाए। सभी पार्षदों ने अपनी-अपनी बात रखी है। अब सभी पार्षदों के सुझाव को पार्टी हाईकमान को भेजा जाएगा और वहां से उम्मीदवार का नाम तय होगा। माना जा रहा है कि नामांकन से एक दिन पहले या उसी दिन भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकते हैं।

गठबंधन में लड़ने की तैयारी लेकिन अब तक साथ एक भी बैठक नहीं
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस बार भी मेयर चुनाव गठबंधन में लड़ने की तैयारी की है। नामांकन में सात दिन का समय रह गया है लेकिन अब तक दोनों पार्टियों की एक भी औपचारिक जॉइंट मीटिंग नहीं हुई है। ये दोनों पार्टियां अलग-अलग राह पर चल रही हैं और बैठकें कर रही हैं। अब तक सीट शेयरिंग और रणनीति पर भी जॉइंट मीटिंग नहीं हो पाई है। इससे भी संदेह पैदा हो रहा है। उधर, शनिवार को कांग्रेस की जो बैठक हुई, उसमें कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेता ने गठबंधन तोड़ने तक की बात कही थी। बैठक के दौरान यह मुद्दा उठा था कि पिछली सदन की बैठक में जब गुरप्रीत सिंह गाबी के हाथ से भाजपा पार्षदों ने पोस्टर छीने तो इस पर मेयर कुलदीप कुमार ने किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस के पार्षदों ने इस पर नाराजगी जताई है। कहा कि उनके पार्षद के साथ सदन में दुर्व्यवहार हुआ लेकिन गठबंधन में होने के बावजूद मेयर ने कुछ भी नहीं किया। ऐसे में उनका साथ देना कितना सही है। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गठबंधन के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
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